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रात के ढाई बजे जग जाना है कामयाबी का राज, नहीं जानते होंगे आप ये बात
ब्रायन लुफकिन, बीबीसी कैपिटल
Updated Tue, 18 Sep 2018 04:42 PM IST
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sleeping om stomach
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हॉलीवुड स्टार और दो बार ऑस्कर पुरस्कारों के लिए नॉमिनेट किए गए मार्क वॉलबर्ग ने पिछले हफ्ते खुलासा किया कि वे रात के ढाई बजे जग जाते हैं। जब आप सो रहे होते हैं, उस वक्त वॉलबर्ग जिम में कसरत कर रहे होते हैं। वे जिम में 90 मिनट बिताते हैं। फिर गोल्फ खेलते हैं और प्रार्थना करते हैं। वॉलबर्ग शाम में साढ़े सात बजे ही सोने चले जाते हैं। जल्दी जगने वालों में वॉलबर्ग अकेले नहीं हैं। ऐप्पल के सीईओ टिम कुक सुबह पौने चार बजे जगते हैं।
exercise
कितनी जल्दी जगा जाए
रात के ढाई बजे दिन की शुरुआत करने का मतलब है बहुत ही लंबा दिन और लगभग न के बराबर आराम। लेकिन वॉलबर्ग के सोने के वक्त को देखकर लगता है कि वे हर रोज सात घंटे जरूर सोते हैं। काम करने के लिए यह जरूरी है। नींद से समझौता हो तो सेहत बिगड़ जाती है। दिमाग भी सही से नहीं चलता। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफर बार्न्स और मिशिगन यूनिवर्सिटी की ग्रेचेन स्प्रिट्जर ने इस विषय पर गहन शोध किया।
उनके सामने प्रश्न यह था कि क्या कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके कर्मचारी पूरी नींद लें। शाम के साढ़े सात बजे ही बेडरूम में चले जाने का मतलब है कि आप परिवार के साथ डिनर नहीं कर पा रहे और दोस्तों के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी हिस्सा नहीं ले पा रहे।
रात के ढाई बजे दिन की शुरुआत करने का मतलब है बहुत ही लंबा दिन और लगभग न के बराबर आराम। लेकिन वॉलबर्ग के सोने के वक्त को देखकर लगता है कि वे हर रोज सात घंटे जरूर सोते हैं। काम करने के लिए यह जरूरी है। नींद से समझौता हो तो सेहत बिगड़ जाती है। दिमाग भी सही से नहीं चलता। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफर बार्न्स और मिशिगन यूनिवर्सिटी की ग्रेचेन स्प्रिट्जर ने इस विषय पर गहन शोध किया।
उनके सामने प्रश्न यह था कि क्या कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके कर्मचारी पूरी नींद लें। शाम के साढ़े सात बजे ही बेडरूम में चले जाने का मतलब है कि आप परिवार के साथ डिनर नहीं कर पा रहे और दोस्तों के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी हिस्सा नहीं ले पा रहे।
sleep on sofa
चकवा और उल्लू
इंसान के सोने और जगने का समय उनके शरीर की आंतरिक घड़ी से नियंत्रित होता है। शरीर खुद सिग्नल देता है कि कब सोना है और कब जगना है। कई लोग तय समय पर जगने और तय समय पर सोने के इतने अभ्यस्त हो जाते हैं कि अलग टाइम जोन में जाने पर उनका शरीर बुरी तरह जेटलैग का शिकार हो जाता है। सोने और जगने के समय के आधार पर शोधकर्ता लोगों को मोटे तौर पर दो समूहों में बांटते हैं। जल्दी जगने और जल्दी सोने वालों को चकवा (पक्षी) की तरह कहा जाता है। देर से सोने और देर से जगने वालों को उल्लू की संज्ञा दी जाती है। बार्न्स कहते हैं कि बचपन में लगभग सभी व्यक्ति चकवा की तरह होते हैं। वे जल्दी जगते और जल्दी सो जाते हैं। जवानी आते ही इंसान उल्लू की तरह होने लगता है। उसे देर से नींद आती है और वह देर से ही जगना चाहता है।
बुढ़ापे में इंसान फिर से जल्दी जगने और जल्दी सोने लगता है। बार्न्स मानते हैं मार्क वॉलबर्ग की तरह रात के ढाई बजे जगने वाले व्यक्ति विरले होते हैं। "मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक रूप से आप सबसे अच्छा तब महसूस करते हैं, जब अपने शरीर की आंतरिक घड़ी के अनुसार सोते और जगते हैं।" जो लोग शरीर की आंतरिक घड़ी को नजरअंदाज करके अपने के साथ ज्यादती करते हैं और दूसरों को भी ऐसा करने को प्रेरित करते हैं, वे किसी और लक्ष्य से प्रेरित होते हैं।
इंसान के सोने और जगने का समय उनके शरीर की आंतरिक घड़ी से नियंत्रित होता है। शरीर खुद सिग्नल देता है कि कब सोना है और कब जगना है। कई लोग तय समय पर जगने और तय समय पर सोने के इतने अभ्यस्त हो जाते हैं कि अलग टाइम जोन में जाने पर उनका शरीर बुरी तरह जेटलैग का शिकार हो जाता है। सोने और जगने के समय के आधार पर शोधकर्ता लोगों को मोटे तौर पर दो समूहों में बांटते हैं। जल्दी जगने और जल्दी सोने वालों को चकवा (पक्षी) की तरह कहा जाता है। देर से सोने और देर से जगने वालों को उल्लू की संज्ञा दी जाती है। बार्न्स कहते हैं कि बचपन में लगभग सभी व्यक्ति चकवा की तरह होते हैं। वे जल्दी जगते और जल्दी सो जाते हैं। जवानी आते ही इंसान उल्लू की तरह होने लगता है। उसे देर से नींद आती है और वह देर से ही जगना चाहता है।
बुढ़ापे में इंसान फिर से जल्दी जगने और जल्दी सोने लगता है। बार्न्स मानते हैं मार्क वॉलबर्ग की तरह रात के ढाई बजे जगने वाले व्यक्ति विरले होते हैं। "मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक रूप से आप सबसे अच्छा तब महसूस करते हैं, जब अपने शरीर की आंतरिक घड़ी के अनुसार सोते और जगते हैं।" जो लोग शरीर की आंतरिक घड़ी को नजरअंदाज करके अपने के साथ ज्यादती करते हैं और दूसरों को भी ऐसा करने को प्रेरित करते हैं, वे किसी और लक्ष्य से प्रेरित होते हैं।
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sleep in office
धौंस जमाने की कोशिश
जल्दी जगने वाले लोग इस बात को लेकर दूसरे पर रौब क्यों गांठते हैं? ऐसा करके वे दिखाना चाहते हैं कि वे ज्यादा काम करते हैं। भारत सहित कई देशों की संस्कृतियों में ऐसा मान लिया गया है कि जो लोग जल्दी जगते हैं वे ज्यादा अच्छे होते हैं। 2014 में 120 वयस्क लोगों पर एक अध्ययन हुआ था जिसमें पाया गया कि जिन्होंने दिन में देर से काम शुरू किया, उनको सुपरवाइजर से खराब रेटिंग मिली। सुपरवाइजर ने उनको कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी नहीं माना।
दिलचस्प है कि जो सुपरवाइजर खुद देर से जगने वाले थे उन्होंने कम नकारात्मक रेटिंग दी। बार्न्स कहते हैं, "लोग आपके काम को आपके शिड्यूल के हिसाब से भी आंकते हैं। अगर आप सुबह जल्दी अपना काम शुरू करते हैं तो आपको पसंद किया जाता है।" सवाल है कि आप हासिल क्या करना चाहते हैं? क्या आप सिर्फ लोगों को प्रभावित करना चाहते हैं? अगर आप सुन सकते हैं तो अपने शरीर की सुनिए। यह समझिए कि आपके शरीर को कब आराम की जरूरत है।
यदि आप अधिक काम करने के लिए सुबह जल्दी उठ रहे हैं तो अपने काम का मूल्यांकन कीजिए। खुद से यह जरूर पूछिए कि आप सुबह बहुत जल्दी क्यों उठ रहे हैं- ज्यादा काम करने के लिए या किसी को प्रभावित करने के लिए?वजह चाहे जो हो, आपकी सेहत सबसे जरूरी है। बार्न्स के शोध ने दिखाया है कि जबर्दस्ती जगना और शरीर को काम में लगना अनैतिक है। बार्न्स कहते हैं, "अगर आप काम में मन नहीं लगा पा रहे हैं तो आप गलतियां करेंगे।" इस स्थिति से बचने की जरूरत है।
जल्दी जगने वाले लोग इस बात को लेकर दूसरे पर रौब क्यों गांठते हैं? ऐसा करके वे दिखाना चाहते हैं कि वे ज्यादा काम करते हैं। भारत सहित कई देशों की संस्कृतियों में ऐसा मान लिया गया है कि जो लोग जल्दी जगते हैं वे ज्यादा अच्छे होते हैं। 2014 में 120 वयस्क लोगों पर एक अध्ययन हुआ था जिसमें पाया गया कि जिन्होंने दिन में देर से काम शुरू किया, उनको सुपरवाइजर से खराब रेटिंग मिली। सुपरवाइजर ने उनको कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी नहीं माना।
दिलचस्प है कि जो सुपरवाइजर खुद देर से जगने वाले थे उन्होंने कम नकारात्मक रेटिंग दी। बार्न्स कहते हैं, "लोग आपके काम को आपके शिड्यूल के हिसाब से भी आंकते हैं। अगर आप सुबह जल्दी अपना काम शुरू करते हैं तो आपको पसंद किया जाता है।" सवाल है कि आप हासिल क्या करना चाहते हैं? क्या आप सिर्फ लोगों को प्रभावित करना चाहते हैं? अगर आप सुन सकते हैं तो अपने शरीर की सुनिए। यह समझिए कि आपके शरीर को कब आराम की जरूरत है।
यदि आप अधिक काम करने के लिए सुबह जल्दी उठ रहे हैं तो अपने काम का मूल्यांकन कीजिए। खुद से यह जरूर पूछिए कि आप सुबह बहुत जल्दी क्यों उठ रहे हैं- ज्यादा काम करने के लिए या किसी को प्रभावित करने के लिए?वजह चाहे जो हो, आपकी सेहत सबसे जरूरी है। बार्न्स के शोध ने दिखाया है कि जबर्दस्ती जगना और शरीर को काम में लगना अनैतिक है। बार्न्स कहते हैं, "अगर आप काम में मन नहीं लगा पा रहे हैं तो आप गलतियां करेंगे।" इस स्थिति से बचने की जरूरत है।