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आपको डिप्रेशन में धकेल रही हैं सबसे आम दवाइयां, नहीं जानते होंगे यह बात
बीबीसी हिंदी
Updated Sat, 23 Jun 2018 06:27 PM IST
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Medicine
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आपके जेहन में त्वचा पर लाल दाने, सिरदर्द या उल्टी जैसी चीजें आती होंगी, लेकिन अमरीका के एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि सबसे ज्यादा इस्तेमाल में आने वाली दवाइयों से अवसाद यानी डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।
डिप्रेशन
अध्ययन में और क्या पता चला?
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन की स्टडी में अमरीका के 18 या उससे ज्यादा उम्र के लोगों से बात की गई। इन लोगों ने 2005 से 2014 के बीच कम से कम एक तरह की डॉक्टर की लिखी दवाई ली थी। पाया गया कि डॉक्टर की लिखी इन दवाइयों में से 37 फीसदी में अवसाद को संभावित साइड इफेक्ट बताया गया है।
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन की स्टडी में अमरीका के 18 या उससे ज्यादा उम्र के लोगों से बात की गई। इन लोगों ने 2005 से 2014 के बीच कम से कम एक तरह की डॉक्टर की लिखी दवाई ली थी। पाया गया कि डॉक्टर की लिखी इन दवाइयों में से 37 फीसदी में अवसाद को संभावित साइड इफेक्ट बताया गया है।
medicine shimla
अध्ययन के दौरान इन लोगों में अवसाद की दर ज्यादा पाई गई -
स्टडी की मुख्य लेखक डिमा काटो ने कहा, "कई लोगों को हैरानी होगी कि उनकी दवाइयों का भले ही मूड, घबराहट या डिप्रेशन से कोई लेना देना ना हो। लेकिन फिर भी उन्हें दवाइयों की वजह से अवसाद के लक्षण महसूस हो सकते हैं और अवसाद भी हो सकता है।"
हालांकि ये साफ नहीं है कि क्या दवाइयां खराब मूड की वजह हो सकती हैं। किसी भी कारण से बीमार होने पर आपको उदास महसूस हो सकता है। यह भी हो सकता है कि अध्ययन में भाग लेने वाले लोग पहले कभी डिप्रेशन का शिकार रहे हों।
स्टडी की मुख्य लेखक डिमा काटो ने कहा, "कई लोगों को हैरानी होगी कि उनकी दवाइयों का भले ही मूड, घबराहट या डिप्रेशन से कोई लेना देना ना हो। लेकिन फिर भी उन्हें दवाइयों की वजह से अवसाद के लक्षण महसूस हो सकते हैं और अवसाद भी हो सकता है।"
हालांकि ये साफ नहीं है कि क्या दवाइयां खराब मूड की वजह हो सकती हैं। किसी भी कारण से बीमार होने पर आपको उदास महसूस हो सकता है। यह भी हो सकता है कि अध्ययन में भाग लेने वाले लोग पहले कभी डिप्रेशन का शिकार रहे हों।
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विशेषज्ञों का क्या कहना है?
विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अध्ययन में दवाइयों और अवसाद के खतरे की बात कही गई है, लेकिन इसके कारण और असर का जिक्र नहीं है। रॉयल कॉलेज ऑफ साइकैट्रिस्ट के प्रोफेसर डेविड बाल्डविन कहते हैं, "जब किसी को कोई शारीरिक बीमारी होती है तो दिमागी तनाव होना आम है। ऐसे में ये कोई हैरानी की बात नहीं है कि दिल और गुर्दे की बीमारी के लिए ली जाने वाली दवाइयों को अवसाद के खतरे से जोड़कर देखा जाए।" हालांकि अमरीका में हुए इस अध्ययन के सारे पहलू दुनिया के बाकी हिस्सों पर लागू नहीं होते।
विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अध्ययन में दवाइयों और अवसाद के खतरे की बात कही गई है, लेकिन इसके कारण और असर का जिक्र नहीं है। रॉयल कॉलेज ऑफ साइकैट्रिस्ट के प्रोफेसर डेविड बाल्डविन कहते हैं, "जब किसी को कोई शारीरिक बीमारी होती है तो दिमागी तनाव होना आम है। ऐसे में ये कोई हैरानी की बात नहीं है कि दिल और गुर्दे की बीमारी के लिए ली जाने वाली दवाइयों को अवसाद के खतरे से जोड़कर देखा जाए।" हालांकि अमरीका में हुए इस अध्ययन के सारे पहलू दुनिया के बाकी हिस्सों पर लागू नहीं होते।
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कितना खतरा?
खतरा कितना होगा, ये तो दवाई पर निर्भर करता है। गर्भनिरोधक दवाइयों से अवसाद एक आम साइड-इफेक्ट हो सकता है. लेकिन दूसरी दवाइयों के साथ यह इतना आम नहीं है। दस में से एक व्यक्ति को आम तौर पर साइड-इफेक्ट होता है, जबकि दस हजार में से एक को कभी-कभार साइड-इफेक्ट हो जाता है।
इसकी जानकारी दवाई के पैकेट के अंदर दिए जाने वाले काग़ज़ पर लिखी होती है और ऑनलाइन सर्च करके भी इस बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है। रॉयल फार्मास्युटिकल सोसायटी के प्रोफेसर डेविड टेलर कहते हैं, "ये भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि क्या दवाई की वजह से अवसाद होने का कोई व्यावहारिक स्पष्टीकरण दिया गया है।"
खतरा कितना होगा, ये तो दवाई पर निर्भर करता है। गर्भनिरोधक दवाइयों से अवसाद एक आम साइड-इफेक्ट हो सकता है. लेकिन दूसरी दवाइयों के साथ यह इतना आम नहीं है। दस में से एक व्यक्ति को आम तौर पर साइड-इफेक्ट होता है, जबकि दस हजार में से एक को कभी-कभार साइड-इफेक्ट हो जाता है।
इसकी जानकारी दवाई के पैकेट के अंदर दिए जाने वाले काग़ज़ पर लिखी होती है और ऑनलाइन सर्च करके भी इस बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है। रॉयल फार्मास्युटिकल सोसायटी के प्रोफेसर डेविड टेलर कहते हैं, "ये भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि क्या दवाई की वजह से अवसाद होने का कोई व्यावहारिक स्पष्टीकरण दिया गया है।"