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लो जी, वैज्ञानिकों ने खोज लिया बिजली बनाने का नया जुगाड़, अब होगा कुदरत का करिश्मा
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 17 Mar 2018 09:03 AM IST
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electricity
वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सोलर पैनल विकसित किया है जो ऊर्जा के लिए गैस, कोयला आदि प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता को हमेशा के लिए खत्म कर देगा। यह सोलर पैनल सूर्य की रोशनी के साथ-साथ बरसात की बूंदों से भी बिजली बनाने में सक्षम होगा। अभी तक बारिश के दिनों में सोलर पैनल बिजली का उत्पादन नहीं कर सकते थे।
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इससे खासकर उन देशों के लोगों को दिक्कत होती थी जहां ज्यादा दिनों तक बारिश का मौसम होता है। लेकिन नये सोलर पैनल से दुनिया को ऊर्जा की समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकती है। नई तकनीक से लैस इस सोलर पैनल का विकास चीन के शोधकर्ताओं ने किया है। यह वर्षा की बूंदों कदबाव के कारण होने वाले घर्षण से बिजली बनाने में समर्थ है।
electricity plant
भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और चीन समेत विश्वभर के देशों में तेजी से कम होते गैस, तेल और कोयला संसाधनों के मद्देनजर इस तकनीक को वरदान माना जा रहा है। हालांकि यह तकनीक अभी अपने शुरुआती चरण में है। पूर्वी चीन में स्थित सूचाव यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की ओर से बनाया गया यह पैनल एक सामान्य सिलिकन सेल की तरह काम करता है।
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solar energy
इस पैनल पर बिजली उत्पन्न करने वाली एक अतिरिक्त सतह (टेंग) बनी होती है। बरसात के दिनों में पैनल अपने आप ‘ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजेनरेटर’ मोड में चला जाता है जिसे टेंग कहते हैं। इसके बाद यह पैनल वर्षा की बूंदों के गिरने से पड़ने वाले दबाव को ऊर्जा में तब्दील कर देता है। टेंग को बनाने में पारदर्शी प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए यह सोलर पैनल बारिश के साथ-साथ सूर्य के रोशनी से भी बिजली उत्पन्न करता रहता है।
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ऐसे बनती है बिजली
हाइब्रिड तकनीक से बने इसे सोलर पैनल की कार्य प्रणाली इलेक्ट्रानों के प्रवाह पर निर्भर है। इलेक्ट्रानों का यह प्रवाह दो चालक पदार्थों के संपर्क में आने के बाद होता है। जब वर्षा की बूंदें सोलर पैनल या सेल पर गिरती हैं तो वे टेंग के ऊपरी सतह पर दबाव डालती हैं। इससे इलेक्ट्रानों का प्रवाह शुरू हो जाता है जो नीचे स्थित एक इलेक्ट्रोड तक पहुंचते हैं और बिजली बनने लगती है। नव विकसित सोलर के बनाने में अब केवल एक ही बाधा रह गई है कि यह वर्षा और सूर्य की किरणों से बनी बिजली का एक ही समय पर संचय नहीं कर सकता है। फिलहाल इस बाधा को दूर करने में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।
हाइब्रिड तकनीक से बने इसे सोलर पैनल की कार्य प्रणाली इलेक्ट्रानों के प्रवाह पर निर्भर है। इलेक्ट्रानों का यह प्रवाह दो चालक पदार्थों के संपर्क में आने के बाद होता है। जब वर्षा की बूंदें सोलर पैनल या सेल पर गिरती हैं तो वे टेंग के ऊपरी सतह पर दबाव डालती हैं। इससे इलेक्ट्रानों का प्रवाह शुरू हो जाता है जो नीचे स्थित एक इलेक्ट्रोड तक पहुंचते हैं और बिजली बनने लगती है। नव विकसित सोलर के बनाने में अब केवल एक ही बाधा रह गई है कि यह वर्षा और सूर्य की किरणों से बनी बिजली का एक ही समय पर संचय नहीं कर सकता है। फिलहाल इस बाधा को दूर करने में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।