साल 2017 में धरती के पास से गुजरा रहस्यमयी स्पेस ऑब्जेक्ट वैज्ञानिकों के लिए अभी भी रहस्य है। वैज्ञानिकों की टीम अभी तक इस ऑब्जेक्ट की उत्पत्ति और पहचान नहीं कर पाई है। कुछ दिनों पहले हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ऐवी लोएब ने दावा किया था कि 19 अक्टूबर, 2017 को देखी गई स्पेस रॉक Oumuamua या एलियंन्स का जहाज था। अब इस बीच वैज्ञानिकों के एक समूह ने कहा है कि यह रहस्यमय चट्टान दूसरे सोलर सिस्टम से आई थी। तारों के बीच एक ऑब्जेक्ट की वैज्ञानिकों ने पहली बार पहचान की है। आईए जानते हैं इसके बारे में...
अमेरिकन जिओफिजिकल यूनियन जर्नल में एक पेपर प्रकाशित किया गया है जिसमें स्पेस रॉक Oumuamua को एक और सिद्धांत दिया गया है। इसमें इस ऐस्टरॉइड को दूसरे सोलर सिस्टम के छोटे ग्रह का टुकड़ा बताया गया है। इस शोध के सहायक लेखक का कहना है कि Oumuamua के रहस्य के बारे में संभवत: खुलासा हो गया है। उन्होंने कहा कि इसकी पहचान हो गई है कि यह चट्टान किसी प्लूटो जैसे ग्रह का एक टुकड़ा थी। शोधकर्ताओं का मानना है कि लगभग 50 करोड़ साल पहले एक स्पेस ऑब्जेक्ट और Oumuamua के मुख्य ग्रह की टक्कर हो गई थी जिससे Oumuamua स्पेस ऑब्जेक्ट का एक टुकड़ा टूट गया होगा और हमारे सोलर सिस्टम में आ गया होगा।
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अंतरिक्ष में तैर रही है रहस्यमय चट्टान
- फोटो : iStock
वैज्ञानिकों का कहना है कि सूरज के पास पहुंचने के बाद इस स्पेस ऑब्जेक्ट की गति बढ़ गई होगी, क्योंकि बर्फ से भरी चट्टान सूरज के ताप से वाष्पीकृत हो गई होगी। धूमकेतु की गति इसी तरह होती है और इसको रॉकेट इफेक्ट कहते हैं। हालांकि Oumuamua चट्टान के निर्माण के बारे में वैज्ञानिकों को जानकारी नहीं मिला पाई है। इसलिए उन्होंने संभावना जताई है कि नाइट्रोजन बर्फ से यह स्पेस ऑब्जेक्ट बना होगा।
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अंतरिक्ष में तैर रही है रहस्यमय चट्टान
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उन्होंने कहा कि यह स्पेस ऑब्जेक्ट पहली बार में साल 1995 में हमारे सोलर सिस्टम में प्रवेश किया था। उस दौरान इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं थी जिसका परिणाम यह है कि यह 95 प्रतिशत पिघल चुका है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह चांदी में बदल चुका है। खगोलविदों को साल 2017 में जब इसके बारे में पता चला, तो बहुत देर हो चुकी थी। इसलिए उनके पास Oumuamua पर रिसर्च के लिए बहुत कम समय था।
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वैज्ञानिकों ने टेलिस्कोप की मदद से इसकी जांच की, लेकिन ज्यादा कुछ पता नहीं कर पाए। अब यह रहस्यमय ऐस्टरॉइड पृथ्वी से बहुत दूर जा चुका है जिसकी जांच संभव नहीं है।