Most Mysterious Reptile: कौन है तीसरी आंख वाला ये 'जीवित जीवाश्म', 19 करोड़ साल से धरती पर है जिंदा
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दुनिया के बेहद अजीबोगरीब जीवों में सरिसृप भी शामिल हैं। तुआतारा सौ साल तक जिंदा रहते हैं। यह जीव ठंडी से ठंडी जगह और विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रह सकता है। इनके जबड़े पीछे से आगे की तरफ खिसकते हैं जिनसे ये अपना शिकार कर सकते हैं। इनकी तीसरी आंख सबसे बड़ी खासियत है जो सिर के ऊपर मध्य में त्वचा की परतों के नीचे छिपी रहती है। यह आंख सूरज की रोशनी को ट्रैक करने में सहायता करती है।
तुआतारा की इन खासियतों की वजह से जैविक पुरातत्वविद हैरान हैं। यह खासयितें डायनासोर के समय में मिलने वाली रहस्यमयी सरिसृप रिंचोसिफैलिंयस में थीं जो वैज्ञानिकों के हैरानी की वजह है। इनके अलावा बाकी सरिसृप, छिपकलियां और सांप में बदलाव हुआ और वह खुद को विकसित करते गए। हालांकि इनमें से ज्यादातर प्रजाति खत्म हो चुकी है। मिसोजोइक काल (Mesozoic Era) के समय की यह बात है।
स्टेफनी पियर्स ने बताया कि उन्होंने हाल ही में हथेली के आकार की एक छिपकली के पूरे जीवाश्म पर शोध किया है। स्टेफनी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के म्यूजियम ऑफ कंपेरेटिव जूलॉजी में वर्टिब्रेट पैलियोंटोलॉजी की क्यूरेटर हैं। इस छिपकली का जीवाश्म साल 1982 में उत्तरी एरिजोना के कायेंटा फॉर्मेशन में पाया गया था, जहां पर डायनासोरों के समय के कई जीवाश्म दफनाए गए हैं।
माना जाता है कि उस काल में डिलोफोसॉरस जैसे डायनासोरों के मगरमच्छों जैसे जीवों के साथ संबंध बनाने से रिंचोसिफैलिंयस नाम के जीव पैदा हुए होंगे। सरिसृपों और स्तनधारियों के गुण वाला तुआतारा बहुत पुराना जीव है जिसकी वजह से इसको रहस्यमयी छिपकली कहते हैं।