देश में सिविल कोड (Uniform Civil Code) लागू करने को लेकर लगातार बहस जारी है। ऐसे में अलग-अलग लोग कई तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। जब देश में सिविल कोड लाने के मुद्दे पर बात चल रही है, इसी बीच अब गोवा की भी चर्चा होने लगी है, जिसका कारण ये है कि वहां पहले से सिविल कोड (Civil Code In Goa) है, जिसके तहत हिंदू पुरुष भी दो शादी कर सकते हैं। हालांकि, ये हिंदू मैरिज एक्ट से अलग है।
अगर आप भी ये सोच रहे हैं कि आखिर गोवा में ये खास नियम क्यों है और वहां दूसरी शादी को अपराध की श्रेणी में क्यों नहीं गिना जाता है? तो आइए जानते हैं कि ये नियम क्या कहता है और इस कानून को कब बनाया गया है... दरअसल, वर्तमान हिंदू मैरिज एक्ट के तहत, कोई भी हिंदू एक साथ एक से ज्यादा पत्नियां नहीं रख सकता है।
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गोवा में हिंदू भी कर सकते हैं दो शादी
- फोटो : istock
दूसरी शादी करने के लिए पहली पत्नी से तलाक लेना अनिवार्य है, अन्यथा इसे अपराध माना जाएगा। ऐसा करने पर व्यक्ति को जेल भी हो सकती है।
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शादी को लेकर क्या है नियम?
हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के मुताबिक, दूसरी शादी कानूनी रूप से मान्य नहीं है। जबकि, मुस्लिम धर्म में लोगों को चार शादी करने की इजाजत है, जिसके तहत वह चार पत्नी रख सकते हैं। यही कारण है कि देश में सिविल कोड की बात होती है और एक जैसे कानूनी की मांग की जा सकती है। हालांकि, गोवा में ऐसा नहीं हैं।
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गोवा के लिए क्यों है अलग नियम?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा के सिविल कोड में 1880 में एक संशोधन किया था, जो उस वक्त के पुर्तगाली राजा द्वारा किया गया था। लेकिन ऐसा कुछ शर्तों के आधार पर ही करने का अधिकार दिया गया था। गोवा के हिन्दू केवल कुछ परिस्थितियों में ही दो शादी कर सकते हैं।
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दरअसल, यदि किसी की पत्नी को 25 साल तक बच्चा नहीं हुआ हो या फिर शादी के 10 साल बाद तक बच्चा ना हो या फिर पहली पत्नी के बच्चा ना हो पाने की स्थिति में वह दूसरी शादी कर सकता है। लेकिन, ये परिस्थिति होना अनिवार्य है।