El Nino: अल नीनो की वापसी से फिर सूखा और बाढ़, मौसम में महाविनाश का अलर्ट
El Nino: अल नीनो की शुरुआत हो चुकी है। अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा कर दी है। अल नीनो का दुनियाभर के मौसम पर प्रभाव पड़ेगा।
कैसे होती है अल नीनो की शुरुआत?
भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर पश्चिमी हवाओं के चलने से अल नीनो की शुरुआत होती है। यह हवाएं समुद्र की सतह के गर्म पानी को पूर्व की तरफ ले जाती हैं। इससे पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत इलाके में गर्म पानी का एक बड़ा भंडार बन जाता है। इस गर्म पानी से उसके ऊपर की हवा भी गर्म होती है।
इसका परिणाम यह होता है कि वैश्विक वायुमंडल में मौसम प्रणालियां फिर से बनने लगती हैं और दुनिया भर के मौसम पैटर्न को प्रभावित करती हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह 1950 से रिकॉर्ड रखे जाने के बाद की सबसे शक्तिशाली या सबसे शक्तिशाली अल नीनो घटनाओं में से एक सकता है।
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क्या होगा दुनिया के मौसम पर प्रभाव?
अल नीनो से अमेरिका के खाड़ी तट पर ज्यादा और गंभीर मौसम की घटनाएं बढ़ने की संभावना है। फ्लोरिडा में ज्यादा बारिश हो सकती है और बवंडर आ सकते हैं। अमेरिका के मध्य और उत्तरी हिस्सों में सर्दी गर्म हो सकती है शुष्क परिस्थितियां बन सकती हैं।
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दक्षिणी अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, इंडोचाइना प्रायद्वीप और ओशिनिया में सूखा पड़ सकता है, तो वहीं दक्षिण-पूर्व एशिया में औसत से ज्यादा बारिश और बाढ़ की घटनाएं हो सकती हैं। अल नीनो का भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून पर गहरा प्रभाव होता है। इसकी वजह से भारत के कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इसके लंबे सूखे दौर और असमान बारिश की स्थिति बन सकती है।