क्या कोई वैज्ञानिक किसी अध्ययन के लिए अपनी जान दे सकता है? इतिहास में ऐसे एक नहीं, कई उदाहरण हैं। इन्ही में से एक कहानी है कार्ल पैटरसन शिमिट की। साल 1957, सितंबर का महीना। अमरीका के शिकागो प्रांत के लिंकन पार्क चिड़ियाघर में काम करने वाले एक शख्स के हाथ एक अजीबोगरीब सांप लगा।
2 of 12
snake
- फोटो : Pexels.com
76 सेंटीमीटर लंबे इस सांप की प्रजाति जानने के लिए वो उसे शिकागो के नैचुरल हिस्ट्री म्यूजियम ले गया। वहां उसकी मुलाकात मशहूर वैज्ञानिक कार्ल पैटरसन शिमिट से हुई। पब्लिक रेडियो इंटरनेशनल से जुड़ीं एलिजाबेथ शॉकमैन कहती हैं कि शिमिट को सरीसृप विज्ञान का एक बड़ा जानकार माना जाता था।
3 of 12
snake
- फोटो : Pexels.com
शिमिट ने देखा कि इस सांप के शरीर पर बहुरंगी आकृतियां हैं। वह सांप की प्रजाति का पता लगाने को तैयार हो गए। इसके बाद 25 सितंबर को उन्होंने अपनी पड़ताल में पाया कि ये अफ्रीकी देशों में पाया जाने वाला एक सांप था। इस सांप का सिर बूमस्लैंग सांपों जैसा था जो कि सब-सहारन अफ्रीका के जंगलों में पाया जाता है। लेकिन शिमिट अपनी इस पड़ताल को लेकर आश्वस्त नहीं थे।
4 of 12
snake
- फोटो : Pexels.com
अपने जर्नल में इस पड़ताल के बारे में लिखते हुए शिमिट बताते हैं कि उन्हें इस सांप के बूमस्लैंग होने पर शक है क्योंकि इस सांप की एनल प्लेट बंटी हुई नहीं थी। लेकिन इस शक को दूर करने के लिए शिमिट ने जो किया, उसकी वजह से उन्हें जान से हाथ धोना पड़ा।
5 of 12
snake
- फोटो : Pexels.com
शिमिट सांप को अपने काफी करीब लाकर उसके शरीर पर बनी आकृतियों का अध्ययन करने लगे। वह अचंभे के साथ सांप के शरीर और सिर पर बनी आकृतियां और रंग देख रहे थे तभी इस सांप ने उनके अंगूठे पर काट लिया। लेकिन शिमिट ने डॉक्टर के पास जाने के बजाय अपने अंगूठे को चूसकर सांप का जहर बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। यही नहीं, उन्होंने अपने जर्नल में सांप के कांटने के बाद हो रहे अनुभवों को दर्ज करना शुरू कर दिया।