{"_id":"5a968db54f1c1b45438b4a19","slug":"monkey-drinks-alcohol-in-this-tample","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"यहां बंदरों को पिलाई जाती है शराब, नहीं जानते होंगे आप ","category":{"title":"Amazing Animals","title_hn":"जीव-जंतु","slug":"amazing-animals"}}
यहां बंदरों को पिलाई जाती है शराब, नहीं जानते होंगे आप
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 02 Mar 2018 03:11 PM IST
विज्ञापन
demo
बेजुबान जानवर जिनके पास इंसानों जैसे सोचने समझने की शक्ति नहीं होती। उन्हें यह तक मालूम नहीं होता कि क्या सही है और क्या गलत। मगर हम इंसान सब समझते-बूझते हुए ऐसा करेंगे वाकयी यह बेहद चौंकाने वाला है।
Trending Videos
demo
एक रिपोर्ट के मुताबिक यूपी के सीतापुर जिले से लगभग 70 किमी दूर स्थित अटवा कुरसठ गांव में बने एक मंदिर की अजीब कहानी है। कहते हैं कि यहां बंदरों को शराब पिलाई जाती है।
demo
चूंकि मंदिर गांव से भी दूर जंगल के बीच में बना है। यह चारों तरफ से खुला है और उसमें कोई दरवाजा या खिड़की नहीं है।
यहां कोई पुजारी भी नहीं बैठता। यहां आने वाले भक्त बाइक, कार आदि से आते हैं। इस मंदिर के भगवान को प्रसन्न करने के लिए यहां शराब का चढ़ावा चढ़ता है। आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि यह शिव भगवान का पुराना मंदिर है। यहां शिवलिंग पर भक्तजन अपनी मनोकामना के लिए शराब चढ़ाते हैं।
यहां कोई पुजारी भी नहीं बैठता। यहां आने वाले भक्त बाइक, कार आदि से आते हैं। इस मंदिर के भगवान को प्रसन्न करने के लिए यहां शराब का चढ़ावा चढ़ता है। आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि यह शिव भगवान का पुराना मंदिर है। यहां शिवलिंग पर भक्तजन अपनी मनोकामना के लिए शराब चढ़ाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
demo
ऐसी मान्यता है कि अगर शिवलिंग पर चढ़ने वाली शराब बंदर पी लेते हैं, तो प्रसाद चढ़ाने वाली की मन्नत जरूर पूरी होती है। इस मंदिर में भक्त शिवलिंग पर शराब और लाई का भोग चढ़ाते हैं। इस भोग को वहां रहनेवाले बंदर मजे से पीते और खाते हैं। लेकिन इन जानवरों को इसकी समझ नहीं। यहां आने वाले लोग मिट्टी या प्लास्टिक के ग्लास में बंदरों के लिए शराब भरकर रख जाते हैं। बंदर वहां चढ़ाई गई लाई को शराब के साथ खाते हैं।
विज्ञापन
demo
मंदिर की छत पर उसे बनवाने वाले का नाम लिखा है। यह मंदिर जिला हरदोई के ग्राम अटवा कुरसठ निवासी राजेश कुमार सिंह ने 1992 में बनवाया था। मंदिर अटवा गांव के प्रतिष्ठित व्यक्ति रहे रामगुलाम सिंह सूर्यवंशी की जन्मभूमि पर बना है। उसके ऊपर उसे बनाने वाले कारीगर परागीलाल सिंह झबरा का भी नाम लिखा है।