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घर का बजट बिगाड़ेंगे पेट्रोल और डीजल, BS6 मानकों के चलते कंपनियां बढ़ा सकती हैं दाम!

Wed, 18 Dec 2019 02:17 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 18 Dec 2019 02:17 PM IST
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BS6 compliant fuel could be costly for customers, Refineries planning to hike the cost
BS6 Petrol Diesel - फोटो : AmarUjala

अप्रैल 2020 से देशभर में नए उत्सर्जन मानक लागू होने हैं। देश में कई जगहों पर अब BS6 फ्यूल भी मिलने लगा है। वहीं अब ईंधन के दाम बढ़ाने के लिए रिफाइनरीज सरकार से सहयोग की उम्मीद कर रही हैं। उनका कहना है कि कम प्रदूषण फैलाने वाले नए उत्सर्जन मानक वाले ईंधन के उत्पादन के लिए उन्होंने काफी निवेश किया है। वहीं अगर ऐसा हुआ तो ग्राहकों पर तेल की बढ़ी हुई कीमतें चुकानी पड़ेंगी।

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पेट्रोल, डीजल पर इतनी होगी बढ़ोतरी

रिफाइनरी सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि कंपनियों काफी निवेश करके अपनी संयंत्रों को अपग्रेड किया है, जिसके चलते उनकी उत्पादन लागत बढ़ गई है। कंपनियां चाहती हैं कि पेट्रोल पर 80 पैसा और डीजल पर 1.45 रुपये की बढ़ोतरी की जाए, साथ ही ये बढोतरी अगले पांच सालों के लिए की जाए, ताकि उनके निवेश की भऱपाई हो सके।

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35 हजार करोड़ रुपये खर्च

इंडियन ऑयल कारपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन और मैंगलोर रिफाइनरी और पेट्रोकैमिकल्स ने अपनी यूनिट्स को बीएस6 में अपग्रेड करने में तकरीबन 35 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इन कंपनियों को सरकार से तरफ से पूरे देश में एक अप्रैल 2020 से बीएस6 ईंधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। वहीं निजी क्षेत्र की रिफाइनरीज ने भी इसमें काफी मात्रा में निवेश किया है।

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निजी कंपनियां भी परेशान              

हर साल तकरीबन दो करोड़ टन तेल का उत्पादन करने वाली नायरा एनर्जी (पहले एस्सार ऑयल) अपने उत्पादन का 60 फीसदी हिस्सा घरेलू बाजार में बेचती है। कंपनी के सीईओ बी आनंद ने ईटी से बातचीत में बताया कि वे समस्या के हल कोशिश कर रहे हैं लेकिन सवाल वही है, क्योंकि हमने बड़ी मात्रा में निवेश किया है और निवेश वापसी का कोई तरीका चाहते हैं।

30 हजार करोड़ रुपये का खर्चा

इससे पहले जुलाई में भी कंपनियों ने अपग्रेडेशन की लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने की मांग की थी। कंपनियों को कहना था कि बीएस-6 मानकों को अनुरूप तेल बेचने के लिये उन्हें अपनी मशीनरी को अपग्रेड करना पड़ेगा, जिसके चलते उन्हें भारी निवेश की आवश्यकता पड़ेगी। उस समय तकरीबन 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश का अंदाजा लगाया गया था। कंपनियों का कहना था कि इतने बड़े निवेश के बाद उसका रिटर्न भी चाहिये होगा, जिसमें प्रोफिट शामिल नहीं है।

सरकार पहले ही बढ़ा चुकी हैं कीमतें

वहीं गाहकों पर यह दोगुनी मार होगी, क्योंकि बजट-2019-20 में सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। सरकार ने ईंधन पर एक रुपये अतिरिक्त स्पेशल एक्साइज और रोड एवं इंफ्रास्ट्रक्चर सेस के नाम पर एक रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।  

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