अगर आपके पास पैसा टिकता नहीं है, तो इसका कारण आपकी जेब में छिपा हो सकता है। इन कारणों को पहचानकर दूर कीजिए। पैसा भी रुकेगा और प्रसन्न भी रहेंगे।पर्स में बिना काम की तमाम चीजें रखकर हम अपने पर्स को कूड़ेदान बना लेते हैं। इसका असर यह होता है कि धन की देवी लक्ष्मी रुष्ट होती हैं और फालतू के खर्चे, पैसा न रुकने जैसी समस्या हो सकती है। ज्यादातर लोगों की आदत होती कि वह अपने पर्स में पुराने बिल, विजिटिंग कार्ड, कागज, दवाई की पर्ची को बिना काम के भी संभाल कर रखते हैं। दिखने में यह कागज सामान्य लगते हैं, लेकिन यह आमदनी बढ़ने से रोकते हैं।
भूलकर भी पर्स में ना रखें ऐसी चीजें, राहु का बढ़ता है प्रभाव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्योतिषशास्त्र कहता है कि रद्दी कागज से राहु का प्रभाव बढ़ता है, जो आमदनी को घटाता है। लोगों की आदत होती है कि वह पर्स को पैंट की पिछली जेब में रखते हैं। ऐसा करने से धन की देवी लक्ष्मी लौट जाती हैं।
जिस पर्स में आप पैसा रखते हैं, वह फटा-पुराना नहीं होना चाहिए। मान्यता है कि अगर पर्स फटा हुआ है, तो आर्थिक तंगी बनी रहती है और अनावश्यक खर्च बढ़ते हैं। फटा हुआ पर्स शनि के प्रभाव को भी बढ़ाता है। इससे बनते कार्यों में अवरोध आते हैं और धन हानि होती है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, अपने पर्स में मृत व्यक्ति की तस्वीर, जंगली जानवर का चित्र भी नहीं रखना चाहिए। यह नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है, जिससे आर्थिक संकट बना रहता है। पॉकेट में रखने जाने वाले पर्स में धार्मिक वस्तु या देवी-देवताओं के चित्र भी नहीं रखने चाहिए। पर्स हमारे साथ-साथ कई अपवित्र स्थानों पर जाता है, जिससे देवी-देवता रुष्ट होते हैं और आर्थिक समस्या बनी रहती है।
पुराने बिल, उधारी का हिसाब-किताब भी पर्स में नहीं रखना चाहिए। इससे कर्ज चढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आप चाहते हैं कि धन आगमन बना रहे, तो चांदी या तांबे की वस्तु को अपने पर्स में रख सकते हैं। लोहा पर्स में कभी नहीं रखना चाहिए। जूठे हाथों से कभी भी पर्स को नहीं छूना चाहिए। इससे देवी लक्ष्मी रुष्ट होती हैं।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, फटी हुई जेब के कारण भी धन संबंधी समस्या होती है। पैंट की जेब में यदि छेद हो तो भी धन हानि होती रहती है। जो लोग खुद के पास पैसा होने के बाद भी खुद को गरीब या कंगाल समझते हैं, उन लोगों के हाथ में कभी पैसा नहीं रुकता। मन की दरिद्रता, धन का क्षय कराती है।