ज्योतिष शास्त्र में की प्रकार के शुभ और अशुभ योग बताए गए हैं। इन्हीं में से कालसर्प योग को अशुभ और कष्टकारी माना गया है। किसी भी जातक की कुंडली में यदि कालसर्प दोष का निर्माण होता है तो वह घबरा जाता है, क्योंकि माना जाता है कि कालसर्प दोष के कारण व्यक्ति को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कालसर्प दोष के कारण व्यक्ति के जीवन में पारिवारिक और आर्थिक दोनों तरह की परेशानियां आने लगती हैं। सफलता प्राप्त करने के लिए हर कदम पर या कहा जाए कि लंबे समय तक सामना करना पड़ता है। कुंडली में कालसर्प योग का निर्माण पापक ग्रहों राहु-केतु के कारण लगता है। यदि किसी की कुंडली में कालसर्प योग बनता है तो उसे कुछ कार्य नहीं करने चाहिए।
कुंडली में है कालसर्प दोष होने पर न करें ये काम, राहु-केतु बढ़ा सकते हैं आपकी पीड़ा
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जन्म कुंडली में कालसर्प योग का नाम सुनकर व्यक्ति भयभीत हो जाता है, लेकिन लोगों को यह पता नहीं होता है कि अशुभ प्रभाव के साथ ही कालसर्प योग कुछ शुभ फल भी प्रदान करता है। जन्मकुंडली में कालसर्प दोष का निर्माण होने पर व्यक्ति बहुत परिश्रमी और साहसी होता है। ये जातक कभी हिम्मत नहीं हारते हैं। देर से ही सही लेकिन अपनी मेहनत से ये लोग सफलता भी प्राप्त कर लेते हैं। इसलिए कालसर्प योग से घबराना नहीं चाहिए। बस कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- जातक को ग़लत संगति और गलत कार्यों से दूर रहना चाहिए।
- राहु-केतु की अशुभ स्थिति में या कालसर्प योग बनने पर नशीले पदार्थों से बिल्कुल दूर रहना चाहिए, अन्यथा राहु-केतु के कारण आपके जीवन में समस्याएं बढ़ने लगती हैं।
- जिसकी कुंडली में कालसर्प योग हो उसे झूठ बिल्कुल भी नहीं बोलना चाहिए।
कुंडली में कालसर्प योग होने पर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। इससे राहु और केतु के बुरे प्रभावों से मुक्ति प्राप्त होती है। कालसर्प के निवारण हेतु महाशिवरात्रि पर्व का दिन बहुत उत्तम रहता है। इसके अलावा महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का रूद्राभिषेक करना चाहिए।