शनिदेव का नाम जेहन में आते ही अक्सर मन किसी अनिष्ट की आशंका से घबराने लगता है। शनि को यम, काल, दु:ख, दारिद्रय तथा मंद कहा जाता है। मौजूदा दौर में किसी भी परेशानी, संकट, दुर्घटना, आर्थिक नुकसान, अपमान आदि के समय हम उसके मूल में शनि का होना मान लेते हैं, लेकिन क्या यह सही है? निश्चित तौर पर शनि दंड के स्वामी हैं। परंतु तभी, जब आपने कोई गलत कार्य किया हो। शनि कर्म के देवता हैं और आपके किए गए कार्य का फल जरूर देते हैं। इसलिए ग्रहों की चाल में शनि को लेकर अब घबराने की जरूरत नहीं है। शनिदेव को मनाने के लिए किए जाने वाले सनातनी उपाय को करके आप कुंडली के उन दोषों को दूर कर सकते हैं जिनके कारण आपको कष्ट उठाने पड़ते हैं। शनि को मनाने के लिए किए जाने वाले सनातनी उपायों को जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
शनि को मनाने के 7 चमत्कारी उपाय, करते ही लौट आते हैं अच्छे दिन
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1.
शनिदेव की कृपा पाने के लिए अपने माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करें। यदि आप अपने माता-पिता से दूर रहते हैं तो उन्हें फोन से या फिर मन ही मन प्रतिदिन प्रणाम करें। माता-पिता की फोटो अपने पर्स में रखते हों तो उनके श्री चरणों की तस्वीर भी रखें।
2.
यदि आप पर शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही है आप खुद को तमाम परेशानियों से घिरा पा रहे हैं तो शमी के वृक्ष की जड़ को काले कपड़े में पिरोकर शनिवार की शाम दाहिने हाथ में बांधे तथा ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: मंत्र का तीन माला जप करें।
3.
शनि से जुड़े दोष दूर करने या फिर उनकी कृपा पाने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है। नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है।
4.
भगवान शिव की तरह उनके अंशावतार बजरंग बली की साधना से भी शनि से जुड़ी दिक्कतें दूर हो जाती हैं। कुंडली में शनि से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंदिर में जाकर अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मीठा प्रसाद चढ़ाएं।