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विंटर गेम्स की मेजबानी से हाथ धो सकता है उत्तराखंड
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 09 Sep 2014 01:10 PM IST
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विंटर गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया(डब्ल्यूजीएफआई) की नई कमेटी से उत्तराखंड का पत्ता साफ होने के बाद विंटर गेम्स की मेजबानी पर भी खतरा खड़ा हो गया है।
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औली की वादियों में छा जाएगा सन्नाटा
फेडरेशन का कार्यालय अब गुलमर्ग शिफ्ट होने की संभावना है। ऐसे हुआ तो विदेशी मेहमानों से गुलजार रहने वाले औली की वादियों में सन्नाटा छा जाएगा।
सोमवार को डब्ल्यूजीएफआई के नए अध्यक्ष जेएस ढिल्लन, महासचिव रोशन ठाकुर और कोषाध्यक्ष सतपाल रायपुर स्थित फेडरेशन के ऑफिस पहुंचकर कार्यभार संभाल लिया। साथ ही फेडरेशन के सभी दस्तावेज, खाते और ऑडिट रिपोर्ट कब्जे में ले ली।
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फेडरेशन के नए पदाधिकारियों ने मीडिया से बात करने से मना कर दिया और कार्यालय शिफ्ट करने के सवाल पर बचते नजर आए। वहीं, पूर्व अध्यक्ष एसएस पटवाल ने कहा कि जहां का अध्यक्ष होता है फेडरेशन का कार्यालय वहीं होता है।
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बीत आठ साल से कार्यालय उत्तराखंड में था, लेकिन इस बार गुलमर्ग स्थित आईटीएसएम के प्रधानाचार्य जेएस ढिल्लन अध्यक्ष बने हैं, इसलिए कार्यालय भी वहीं बनेगा। हालांकि, देहरादून में स्टेट फेडरेशन का कार्यालय बना रहेगा। इस दौरान विंटर गेम्स फेडरेशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष एसएस पांगती, प्रवक्ता पीसी थपलियाल भी मौजूद थे।
कैसे होगी प्रतियोगिता
औली में विश्व स्तरीय आईस स्लोप और राजधानी में आईस रिंक के बलबूते उत्तराखंड विंटर गेम्स की पहचान बना रहा है। लेकिन, अब स्थिति बिल्कुल उलट हो सकती है। बीते साल एसएस पटवाल ने औली में दिसंबर 2014-जनवरी 2015 में फिस(एफआईएस) रेस कराने की घोषणा की थी।
इसमें क्वालीफाई होने के बाद ही कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर सकता है। हालांकि एसएस पटवाल ने अब भी प्रतियोगिता कराने का दावा किया है, लेकिन इसके लिए अब उन्हें राज्य सरकार का मुंह ताकना पड़ेगा।