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अब मेडलिस्टों की माताओं को भी मिलेगा सम्मान
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 22 May 2014 04:43 PM IST
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मां, वह शख्सियत है जो ताउम्र अपने बच्चों की कामयाबी के लिए चुपचाप खटती रहती है। बदले में वह न कभी कुछ मांगती है, न चाहती है।
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लेकिन बच्चे जब राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम, पहचान कमाने लगते हैं तो इसका पूरा श्रेय उनके गुरुओं को ही मिलता है।
माताओं के सम्मान के लिए आगे आई क्रीड़ा भारती
अब क्रीड़ा भारती प्रदेश के खिलाड़ियों की माताओं के सम्मान के लिए आगे आई है। संगठन वीर माता जीजाबाई पुरस्कार प्रारंभ कर रहा है। अगस्त-सितंबर में यह समारोह होने की उम्मीद है।
क्रीड़ा भारती उत्तराखंड के उपाध्यक्ष एके सूद ने बताया कि नागपुर में वर्ष 1998 में पहली बार यह पुरस्कार दिया गया था। उत्तराखंड में संगठन दो साल पहले अस्तित्व में आया और इस साल से यह अवार्ड शुरू किया जा रहा है।
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बताया कि पुरस्कार के लिए प्रदेश भर से आवेदन मांगे जाएंगे, जिन्हें अंतिम चयन के लिए अखिल भारतीय नियामक मंडल को भेजा जाएगा। सम्मान में खिलाड़ी की मां को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और शाल दिया जाएगा।
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क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नारायण सिंह राणा ने कहा कि इसमें अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को शामिल किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने के साथ ही जिला स्तर पर भी सम्मान किया जाएगा।
ग्रामीण खेलों को बढ़ावा
क्रीड़ा भारती का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण खेलों को बढ़ावा देना है। साथ ही खिलाड़ियों को तराशकर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर मुकाम दिलाने का काम क्रीड़ा भारती कर रही है।
एके सूद ने बताया कि विशेष रूप से पौराणिक व ग्रामीण खेल कबड्डी, कुश्ती, तीरंदाजी, वालीबाल का आयोजन कराया जा रहा है।
साथ ही बाक्सिंग, जूडो आदि खेलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। सम्मान के लिए इन खेलों पर विशेष फोकस होगा।