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हौसले के पंच से कैंसर को पछाड़ा वॉलीबॉल के इस कोच ने

Sat, 26 Apr 2014 04:41 PM IST
अमित कौशिक/अमर उजाला, करनाल
अमित कौशिक/अमर उजाला, करनाल Updated Sat, 26 Apr 2014 04:41 PM IST
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Vollyball Coach Sultan Singh Defeated Cancer

कौन कहता है आसमां में छेद हो नहीं सकता... एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो! यह पंक्तियां हमेशा हौसले और साहस को बढ़ावा देती हैं। करनाल के वालीबॉल कोच सुल्तान सिंह का जीवन भी ऐसे ही हौसले की कहानी है। कैंसर नाम की जिस जानलेवा बीमारी का नाम सुनते ही बड़े-बड़ों के हौसले जवाब दे देते हैं, उस बीमारी को सुल्तान सिंह खेल के मैदान में रोज पटखनी दे रहे हैं।

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राहड़ा गांव के रहने वाले सुल्तान सिंह करनाल कर्ण स्टेडियम में वालीबाल कोच के पद पर 1992 से कार्यरत हैं। सन 1994 में करनाल में शिफ्ट हो गए थे। दिसंबर 2007 में उन्हें से पता चला कि उन्हें कैंसर है। यह पता चलते ही जैसे मौत आंखों के सामने आकर खड़ी हो गई। जनवरी 2008 को जब उन्हें पीजीआई में दाखिल करवा दिया गया। उसके पश्चात सात दिन करनाल मुंगा अस्पताल में एडमिट रहे। उस दौरान उनके उनके सारे बाल झड़ चुके थे।
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उन्होंने बताया कि कैंसर होने से पहले उनका वजन 96 किलो था, लेकिन सात दिन अस्पताल में एडमिट होने के बाद उनका वजन केवल 56 किलो रह गया था। उन्होंने धीरे-धीरे बिखर चुकी हिम्मत को बटोरा और बिस्तर छोड़ कर खेल के मैदान में उतर आए। कर्ण स्टेडियम में जिम्नास्टिक कोच राजरानी ने उनको प्रेरित किया।
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पत्नी बनी हिम्मत

जब हरियाणा कोचिज एसोसिएशन के इस बात को पता चला कि वो कैंसर से पीड़ित हैं तो एसोसिएशन ने उनका सहयोग करने के साथ साथ नियमों में परिवर्तन कर दिया। परिवार की ओर से भी उन्हें पूरा सहयोग प्राप्त हुआ। उनकी पत्नि अस्थमा से पीड़ित है। वह अपनी बीमारी को भूल कर अपने पति की हिम्मत बन गई।

खास बात तो यह कि एडमिट होने के अलावा उन्होंने बाद में एक भी छुट्टी नहीं ली। अस्पताल से आते ही उन्होंने स्टेडियम में आना शुरू कर दिया था। स्टाफ के कहने के बावजूद भी उन्होंने अपने सैंटर से दूर नहीं रहे। उन्हें चिंता रहती थी कि कहीं उनके खिलाड़ी अनुशासन न भूल जाएं।


यह है सुल्तान की उपलब्धि

सुल्तान सिंह ने बीए 1986 में दयाल सिंह कालेज से की है। वालीबाल का नार्थ जोन में गोल्ड मैडलिस्ट रह चुके हैं। आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में सुल्तान सिंह के मार्गदर्शन में 11 खिलाड़ी अंतराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। 2006 में थाइलैंड में हुए वालीबाल वर्ल्ड यूथ कप हुआ था, उनमें तीन खिलाड़ी दर्शन सिंह , सुरजीत सिंह व रामपाल भारत की टीम में शामिल थे। उस समय फाइनल मैच ब्राजील के साथ हुआ था और भारत दूसरे नंबर पर रहा था। दर्शन सिंह व सुरजीत सिंह वर्तमान में एचएसआईआईडीसी पंचकुला में कार्यरत हैं।

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