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मिलिए, विंटेज गाड़ियों के शौकीन जसवंत सिंह से
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 21 Apr 2014 06:53 PM IST
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विटेंज गाड़ियां जब सड़कों पर गुजरती हैं तो लोगों की नजर उन पर से हटने का नाम नहीं लेती है। इन गाड़ियों को रखने वाले अपने को किसी नवाब से कम नहीं समझते। शहर में ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने विटेंज गाड़ियों को अपनी जान से अधिक संभाल कर रखा है।
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उन्हीं में से एक है जसवंत सिंह और उनके पिता बलबीर सिंह, जोकि विटेंज गाड़ियों के इतने शौकीन हैं कि अगर उन्हें कही भी ऐसी गाडियां खटारा हाल में दिखाई देतीं तो उन्हें वह खरीद लेते हैं। साथ ही उसे ठीक कर ऐसे लुक में बना देते है कि देखने वाले भी सांसे रोक कर उसे निहारते रहते है।
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जसवंत सिंह ने बताया कि उनके और उनके पिता बलबीर सिंह के गैराज हैं, जिसमें वह पुरानी गाड़ियों को ठीक करने का काम करते है। पिता और मुझे इन गाड़ियों से इतना लगाव हो गया कि विटेंज गाड़ियों को खरीदना शुरू कर दिया। जसवंत सिंह ने बताया मॉरिस 1962 मॉडल, ट्रांप 1950 मॉडल, ऑस्टिन1925 मॉडल, स्टैडर्ड 1961 मॉडल की विटेंज गाड़ियां हैं।
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ऐसा हुआ लगाव
जसवंत सिंह ने बताया कि बचपन में उनके पिता ने अलमारी पर विटेंज कार का स्ट्रीकर लगाया था। उसे देखते ही मन में ठान लिया कि एक दिन ऐसी ही गाड़ियोंको रखना है। पिता बलबीर सिंह केपास क्लासिक एंव विटेंज क्लब की कारे ठीक होने आती थीं। हमने कारें खरीद कर रखनी भी शुरू कर दी।
बच्चों से अधिक देखभाल
जसवंत सिंह ने बताया विटेंज गाड़ियोंकी देखभाल में काफी मेहनत लगती है। उन्हें तो हम अपने बच्चों से भी अधिक देख रेख करते हैं। इन गाड़ियों से अलग ही लगाव हो चुका है।
बिना रूकावट के पूरी की रैली
कसौली रिजॉर्ट की ओर से हैरीटेज बैसाखी ड्राइव का आयोजन सुखना लेक से किया गया। इसमें 17 विटेंज कारों ने हिस्सा लिया। इसमें ट्रांप में सवार होकर जसंवत ने कसौली तक सफर बिना रुकावट के पूरा किया। ट्रांप पेट्रोल से चलती है और इसकी एवरेज 1 लीटर में 8 किलोमीटर है।