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Hindi News ›   Chandigarh ›   Vintage Car in Chandigarh

एक पोते ने संभाल कर रखी है दादा की खरीदी कार

Mon, 10 Mar 2014 12:32 PM IST
संजीव पंगोत्रा/ अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा/ अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 10 Mar 2014 12:32 PM IST
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Vintage Car in Chandigarh
ऑडी, मर्सडीज, बीएमडब्ल्यू , लैंड क्रूजर, जगुआर के लेटेस्ट मॉडल को देखने के लिए हर कोई दीवाना है। लेकिन जब विंटेज गाड़ियां सड़कों पर दिखाई देती हैं तो लोग की पहली प्रतिक्रिया होती है... माई गॉड क्या गाड़ी है। शहर में निकाली गई विंटेज कार रैली में भी लोगों की यही प्रतिक्रियाएं थीं।
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इनमें से कई गाड़ियों का इस्तेमाल राजा-महाराजा किया करते थे। अब इनके कद्रदान इन शान से शाही सवारी का लुत्फ उठाते हैं।

विंटेज कार रैली में शामिल 1923-1949 मॉडल की कई गाड़ियों शेवरले, फोर्ड, मौरिस, लैंड मास्टर्स को हर किसी ने काफी उत्सुकता से छुआ। गुणबीर सोढ़ी अपने पिता करतार सिंह सोढ़ी के साथ 1933 मॉडल शेवरले लेकर रैली में हिस्सा लेने पहुंचे।
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इतनी पुरानी होने के बावजूद कार की चमक  आज भी बरकरार है। यह सबको आकर्षित कर लेती है। गुणबीर सोढ़ी ने बताया कि 1933 में यह गाड़ी उनके दादा ने अपनी शादी पर लाहौर से खरीदी थी।
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उस समय इसकी कुल कीमत 3200 रुपये थी। उसके बाद मेरे पिता करतार सिंह सोढ़ी ने इसे चलाया। आज मैं इसे चलता हूं और इसकी देखभाल करता हूं।

एक ही सेल्फ में हो जाती है स्टार्ट
गुणबीर ने बताया कि उनकी शेवरले पेट्रोल से चलती है और एक सेल्फ में ही स्टार्ट होती है। गाड़ी एक लीटर पेट्रोल में 7 किलोमीटर की एवरेज देती है। उनके अनुसार शौक की कोई कीमत नहीं होती।

वहीं, कैप्टन चरणजी सिंह जब 1939 मॉडल की सनबीम टलबोट की सवारी करते हैं तो इसे किसी शाही सवारी से कम नहीं आंकते। उन्होंने बताया कि उनकी यह गाड़ी उस समय में निजाम हैदराबाद की सवारी हुआ करती थी। वह इस गाड़ी के तीसरे मालिक हैं।

यह गाड़ी उन्होंने तीन हजार रुपये में खरीदी थी। इनके पास कुल तीन विंटेज गाड़ियां हैं। इनमें 1939 मॉडल सनबीम टलबोट, 1949 मॉडल मौरिस और 1955 मॉडल लैंड मास्टर्स हैं। चरणजीत ने कहा कि इन विंटेज गाड़ियों को अपने परिवार की तरह संभाल कर रखते हैं। यह गाड़ियां मेरे लिए अमूल्य हैं।


पार्ट्स बाहर से मंगवाने पड़ते हैं
गाड़ियों के खराब होने के लिए इनके पार्ट्स आसानी से नही मिलते हैं। कई बार तो विदेश से मंगवाने पड़ते हैं। वहीं इन कारों को ठीक करने वाले मैकेनिक भी मुश्किल से ही मिलते हैं।
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