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जल्द होगा सितारों से सजे गोल्ड कप का आगाज
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 19 May 2014 03:49 PM IST
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क्रिकेट की दुनिया में राष्ट्रीय स्तर पर दून को पहचान दिलाने वाले उत्तराखंड गोल्ड कप का 32वां सीजन 25 मई से शुरू हो रहा है।
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क्रिकेटर्स के जीवन में प्लेटफार्म की भूमिका
अपने लंबे सफर में भले ही गोल्ड कप ने कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर्स के शुरुआती खेल जीवन में प्लेटफार्म की भूमिका भी निभाई है, लेकिन 31 साल पहले इसकी शुरुआत बच्चों की प्रेरणा से हुई थी।
बच्चों को क्रिकेट खेलता देख कुछ जुनूनी दोस्तों ने दून में नेशनल लेवल टूर्नामेंट के आयोजन की ठानी और आज वह मुकाम हासिल कर लिया कि देश के विभिन्न राज्यों के साथ नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान और बांग्लादेश की टीमें भी यहां प्रतिभाग करने की चाहत पाले रहती हैं।
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टूर्नामेंट आयोजक क्रिकेट एसोसिएशन आफ उत्तराखंड (सीएयू) के सचिव पीसी वर्मा बताते हैं कि वर्षों पहले वह और 15-20 दोस्त क्रिकेट खेला करते थे।
मैच के बाद सभी कैंट क्षेत्र में चाय की दुकान पर जुटते और गप्पबाजी चलती। एक दिन मैदान में बच्चों को खेलते देखा तो दून में राष्ट्रीय स्तर का टूर्नामेंट कराने का विचार आया।
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दुकान पर दोस्त जुटे तो चर्चा के बाद सहमति बनी। सबने थोड़ी-थोड़ी रकम जोड़ी और वर्ष 1981 में सर्वे ग्राउंड में पहला टूर्नामेंट आयोजित किया गया। तब इसका नाम सीडीए एयरफोर्स क्रिकेट टूर्नामेंट रखा था।
देश-विदेश की टीमें लेती हैं भाग
वर्मा बताते हैं कि पहले टूर्नामेंट में गाजियाबाद, मेरठ सहित 16 टीमों ने प्रतिभाग किया, जबकि खिताब बीएचईएल हरिद्वार ने जीता।
चार साल बाद 1985 में टूर्नामेंट का आयोजन शहर के रेंजर्स ग्राउंड में किया जाने लगा। इसके बाद लगातार हर साल टूर्नामेंट में देश-विदेश की टीमें आ रही हैं।
वर्मा ने बताया कि उत्तराखंड बनने के बाद वर्ष 2000 में टूर्नामेंट का नाम उत्तराखंड गोल्ड कप कर दिया गया। बताया कि इस बार देश की 16 टीमें टूर्नामेंट में शामिल होंगी, आयोजन की आधिकारिक घोषणा 22 या 23 मई को की जाएगी।
धौनी, रैना खेल चुके यहां
भारतीय टीम में शामिल होने से पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी, सुरेश रैना, प्रवीण कुमार, पीयूष चावला समेत कई अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी गोल्ड कप में खेल चुके हैं।
वर्ष 2008 व 2012 में पाकिस्तान के क्वेटा क्लब की टीम ने प्रतिभाग किया। 2013 में नेपाल, बांग्लादेश की टीम यहां खेल चुकी हैं। दोनों टीमें इस बार भी आना चाहतीं थी, लेकिन कागजी कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।
इस बार थर्ड अंपायर भी
सीएयू के सचिव पीसी वर्मा ने बताया कि आयोजन समिति टूर्नामेंट में लगातार हाईटेक बदलाव करती रहती है।
इसके चलते टूर्नामेंट की विश्वसनीयता और गुणवत्ता भी बढ़ती है। बताया कि इस दफा पहली बार टूर्नामेंट में थर्ड अंपायर की भी व्यवस्था की जा रही है।
10 हजार से लाखों में पहुंचा इनाम
गोल्ड कप में पहली बार 1990 में विजेता टीम के लिए दस हजार और उप विजेता के लिए आठ हजार का इनाम रखा गया जो दस साल बाद वर्ष 2000 में क्रमश: एक लाख और 50 हजार हो गया।
अब टीम श्रेणी में तो इनामी राशि यही है, लेकिन व्यक्तिगत पुरस्कारों के तौर पर भी खिलाड़ियों को नकद राशि दी जाने लगी है।
गोल्ड कप में खास
- तीन बार देना बैंक जीत चुकी है खिताब
- दो-दो बार कोलाज ग्रुप और पंजाब ने जीता टूर्नामेंट
- हर टीम में कम से कम 6 रणजी प्लेयर होने जरूरी
- हर मैच के लिए 45-45 ओवर निर्धारित
- उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की निगरानी में होता है टूर्नामेंट