नेशनल चैंपियनशिप में स्कूली बच्चों को बना दिया वेटर
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राष्ट्रीय विद्यालयी वॉलीबाल प्रतियोगिता के उद्घाटन के अवसर पर उत्तराखंड शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई।
बच्चों को न खाने का इंतजाम, न ही खिलाड़ियों के सुरक्षा की कोई व्यवस्था। हद तो तब हो गई जब स्कूली बच्चों को ही वेटर बना दिया गया।
खुद आयोजन में लगे अधिकारी, कर्मचारी बच्चों से बार-बार पानी मांग रहे थे। मामला शिक्षा मंत्री तक पहुंचा तो अधिकारी टालमटोल करते दिखाई दिए। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पानी देने के लिए कर्मचारियों ने बच्चों को बुला-बुलाकर पंडाल में पानी बंटवाना शुरू कर दिया।
संसदीय सचिव और राजपुर रोड विधायक राजकुमार ने इस पर कहा कि शिक्षा विभाग के पास बजट है, स्टाफ है तो बच्चों से पानी क्यों बटवाया जा रहा है।
जब इस बारे में शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी से पूछा गया तो वे आश्चर्य से बोले कि ऐसा नहीं है, आयोजन के लिए पूरी व्यवस्था और कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। मगर फोटो दिखाए जाने पर शिक्षा मंत्री ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों पर भड़कने लगे। इसकी जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
खाना, पानी के लिए भटके बच्चे
मंगलवार को सुबह से शाम तक उद्घाटन का इंतजार कर रहे बच्चों को एक समोसा, एक केला और चार टॉफी देकर टरका दिया गया। शिक्षा विभाग उत्तराखंड का ऐसा इंतजाम था कि अधिकतर स्कूलों के प्रतिभागियों को खाना तो दूर पानी भी नसीब नहीं हो सका।
सुबह 8-9 बजे से ही सांस्कृतिक कार्यक्रम, परेड में शामिल प्रतिभागी मैदान में पहुंच गए थे। मुख्यमंत्री के इंतजार में समय पर उद्घाटन नहीं हो सका। दिन भर रिहर्सल करते रहे बच्चे इस कदर थक गए थे कि कुछ की हालत गिरने वाली हो गई थी।
शिक्षा विभाग ने न खाने की व्यवस्था की और न पीने के पानी की। शिक्षिका दीपिका गौड़ और कुलदीप कौर संधू ने बताया कि टीम में 45 सदस्य हैं। सुबह रेसकोर्स गुरुद्वारे में लंगर खाया, तो हालत कुछ ठीक है। यहां तो खाना तो दूर पानी भी नहीं मिला। शिकायत की तो खाने के पैकेट आए, लेकिन मिलने से पहले ही खत्म हो गए।
खिलाड़ियों की सुरक्षा का नहीं इंतजाम
खेल मैदान में पहुंचने के लिए मंगलवार को खिलाड़ियों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। तेज रफ्तार में सिटी बस और विक्रम के साथ ही दोपहिया वाहन चालक भी खिलाड़ियों को जाते देखकर रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। इसके बावजूद ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने का दावा करने वाली दून पुलिस कहीं दिखाई नहीं दे रही थी।
खिलाड़ियों को खाने के लिए पंडाल तक पहुंचने और वापस आने के लिए वाहनों की भीड़ से लैंसडोन चौक को पैदल पार करना पड़ा। मंगलवार सुबह मंत्रियों के आने के बावजूद पुलिस चौराहे से गायब रही।
बस खेल विभाग के पीआरडी जवान अंदर और बाहर व्यवस्था बनाते दिखे। शिक्षा मंत्री ने यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के लिए पुलिस को निर्देश भी दिए थे।