2014: हल्का-फुल्का मलाल पर शानदार गुजरा साल
खेल के मैदान पर यह साल शानदार गुजरा। सबसे बड़ी खुशी साल अंत में उत्तराखंड को राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी पर मुहर के रूप में मिली। इसी साल उत्तराखंड में पहली बार राष्ट्रीय वॉलीबाल चैंपियनशिप हुई।
जिसमें देश भर की 59 टीमें पवेलियन ग्राउंड में दमखम दिखाती नजर आईं। उत्तराखंड की बालक टीम टूर्नामेंट में कांस्य पदक विजेता बनी।
देहरादून के एसीए मैदान में पहली बार विजय मर्चेंट ट्रॉफी मैच हुआ। मान्यता नहीं मिलने के बावजूद राज्य में बीसीसीआई अधिकृत अंडर-16 बालक वर्ग का तीन दिनी क्रिकेट मैच कराना बड़ी उपलब्धि रहा।
इसके अलावा उत्तराखंड ने पहली बार राष्ट्रीय विद्यालयी क्रिकेट टूर्नामेंट का खिताब जीता। ग्वालियर में प्रतियोगिता के दौरान उसने आईसीएससी को हराया।
2014 में इनका रहा मलाल
1. स्पोर्ट्स कॉलेज में सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक
स्पोर्ट्स कॉलेज में सात करोड़ रुपये की लागत से अगस्त में सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक बिछाया गया। लेकिन पांच महीने बीतने के बावजूद यह खिलाड़ियों के लिए नहीं खुल सका है। उद्घाटन का इंतजार जारी है।
2. परेड ग्राउंड में खेल परिसर
परेड ग्राउंड में बन रहा मल्टी स्पोर्ट्स खेल परिसर पूरा करने के लिए एजेंसी को पहले जुलाई, फिर नवंबर का समय दिया गया, लेकिन काम अब तक पूरा नहीं हो पाया। दिसंबर महीना भी इंतजार करते गुजर गया।
2015 से उम्मीदें
1. राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम
नवंबर 2013 में भूमि पूजन के बाद दिसंबर 2014 तक काम 30 फीसदी हो चुका है। निर्माण एजेंसी ने दिसंबर 2015 में स्टेडियम राज्य को सौंपने का दावा किया है।
2. हल्द्वानी का बहुउद्देशीय स्टेडियम
हल्द्वानी में बहुउद्देशीय स्टेडियम का निर्माण तेजी से चल रहा है। उम्मीद है कि अगले साल यह पूरा हो जाएगा। इसकी क्षमता 25 हजार दर्शकों की है।
इन्होंने किया नाम :
1. ताशी-नुंग्शी
देहरादून की ताशी-नुंग्शी विश्व की सबसे ऊंची सात पर्वत चोटियों पर चढ़ने वाली दुनिया पहली जुड़वा बहनें हैं। 18 दिसंबर को उन्होंने लक्ष्य हासिल कर दुनिया में नाम कर दिया। उनका समिट सेवन मिशन भी इसी वर्ष पूरा हुआ।
2. मनीष मैठाणी
इंडियन सुपर लीग में उत्तराखंड के मनीष मैठाणी को पुणे एफसी ने चुना। आईएसएल खेलने वाले मैठाणी पहले और एकमात्र उत्तराखंडी खिलाड़ी हैं। इनके साथ लीग की आयोजक आईएमजी ने 38 लाख रुपये सालाना का करार किया है।
3. अभिमन्यु ईश्वरन
देहरादून के अभिमन्यु बंगाल की रणजी टीम के सदस्य बने। अंडर-19 वर्ल्ड कप के संभावित 30 खिलाड़ियाें में भी अभिमन्यु को जगह मिली है। टीम की घोषणा बाकी है।
4. लक्ष्य सेन
ओलंपिक 2020 के लिए ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट फाउंडेशन द्वारा चुने गए अल्मोड़ा के नन्हे शटलर लक्ष्य सेन एक महीने के अंतराल में जूनियर विम्बल्डन (अंडर-19) और जूनियर स्विस बैडमिंटन(अंडर-19) चैंपियन बने। डेनमार्क में एरोस कप के अंडर-16 के एकल और युगल का स्वर्ण भी जीता।
अमर उजाला का यूं दिखा असर
प्रदेश में बैडमिंटन रेफरियों की समस्या पर आधारित खबर ‘खेलें या खिलाएं’ प्रकाशित होने के बाद उत्तराखंड बैडमिंटन एसोसिएशन ने रेफरी टेस्ट कराया और प्रदेश को 15 नए रेफरी मिले हैं। एनआईएस प्रशिक्षित कोचों के मानदेय का मुद्दा लगातार उठाने के बाद आखिरकार खेल विभाग ने एनआईएस प्रशिक्षित कोचों को तवज्जो दी। मानदेय 10 से 14 हजार रुपए किया गया।