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खेल नीति में पर्वतारोहियों के लिए है कुछ खास
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 02 Jan 2015 12:30 PM IST
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पर्वतारोहण में बछेंद्री पाल, ताशी-नुंग्शी के नए मुकाम हासिल करने के बाद अब उत्तराखंड में पर्वतारोहियों को तैयार करने के लिए पिथौरागढ़ के मुनस्यारी का भी चयन किया गया है।
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खेल विभाग ने यहां पं. नैन सिंह सर्वेयर के नाम पर प्रशिक्षण केंद्र के अलावा हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर खोलने की योजना बनाई है। गुरुवार को खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल ने विधानसभा में पत्रकारों को राज्य की पहली खेल नीति की जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि राज्य में कई स्थानों पर उच्च स्थलीय प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे। सेना भर्ती में पर्वतीय जिलों के युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और प्रशिक्षण के लिए सैनिक कल्याण विभाग का सहयोग लिया जाएगा।
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खेल नीति में खास
- 15 खिलाड़ियों को मिलेगा उत्तराखंड राज्य खेल पुरस्कार
- खेल विभाग में लागू होगी पे एंड प्ले योजना
- सात के बजाय 22 श्रेणियों में मिलेगी पुरस्कार राशि
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यक्तिगत और टीम स्पर्धा में पदक पर समान पुरस्कार राशि
- अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक पर मिलेगी नौकरी
- प्रशिक्षकों और रेफरियों को भी किया जाएगा सम्मानित
- पुरस्कार राशि में दोगुने से अधिक बढ़ोत्तरी
- भूतपूर्व खिलाड़ियों के लिए पेंशन योजना
एक लाख रुपए इनाम
खेल मंत्री ने बताया कि अर्जुन पुरस्कार की तर्ज उत्तराखंड राज्य खेल पुरस्कार के तहत 15 शीर्ष खिलाड़ियों को 1 लाख रुपए नगद, प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। इनमें 8 व्यक्तिगत, 5 टीम स्पर्धा, एक विकलांग और 1 वेटरन वर्ग शामिल होगा।
वाटर स्पोर्ट्स के लिए रुड़की है विकल्प
38वें राष्ट्रीय खेलों के तहत टिहरी झील में वाटर स्पोर्ट्स के आयोजन की योजना है। हालांकि, भारतीय ओलंपिक महासंघ की टीम के दौरे के बाद आयोजन स्थल में बदलाव हो सकता है। खेल मंत्री ने बताया कि रुड़की गंगनहर को विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। वहां सभी सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।
हरिद्वार में भी खेल गांव की तलाश
राष्ट्रीय खेलों 2018 में देश भर से 12 हजार से अधिक खिलाड़ियों के आने की उम्मीद है। इसके लिए खेल विभाग को खेल गांव भी तैयार करना है। खेल मंत्री ने बताया कि खेल गांव के लिए पहली प्राथमिकता देहरादून है, लेकिन हरिद्वार में भी विकल्प तलाश जा रहा है। फोर लेन सड़क तैयार होने के बाद हरिद्वार से दून का सफर आधे घंटे में तय किया जा सकेगा।
'ऐसी जगह भेजूंगा, जहां वाकई फोन नहीं मिलेगा'
मंत्री जी, उत्तराखंड का राज्य खेल क्या है...? विधान भवन में पत्रकारों की ओर से खेल मंत्री के सामने सवाल उठते ही खुद मंत्री दिनेश अग्रवाल और खेल अफसरों ने एक सुर में फुटबॉल का नाम लिया।
14 साल के अंदर राज्य में फुटबॉल के गिरते स्तर के सवाल पर सभी ने खामोशी ओढ़ ली। मंत्री ने फुटबॉल का स्तर बढ़ाने का आश्वासन जरूर दिया, लेकिन उत्तराखंड स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन सचिव और सहायक खेल निदेशक कुमाऊं अख्तर अली को जमकर फटकार लगाई।
फोन नहीं उठाने की शिकायत पर मंत्री बोले, ऐसा दोबारा हुआ तो अगली बार ऐसी जगह भेजूंगा, जहां वाकई फोन नहीं मिलेगा। गुरुवार को विधान भवन में राज्य खेल के स्तर से जुड़े सवाल पर खेल मंत्री ने चुप्पी साध ली तो राजधानी में 14 साल में एक भी राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता नहीं होने पर एसोसिएशन सचिव नजरें चुराते नजर आए।
हालांकि मंत्री ने फुटबॉल स्तर बढ़ाने के लिए सुविधाएं बढ़ाने का भरोसा दिया। इस बीच सहायक खेल निदेशक पर फोन न उठाने की आरोप लगा तो खेल मंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने अख्तर को बुलाकर वजह पूछी तो वे चुप्पी साध गए।
खेल मंत्री बोले, मुझसे सीखो, कितना भी बिजी हूं, फोन जरूर उठाता हूं। कभी नहीं उठा सका तो मिस कॉल देखकर वापस फोन करता हूं। तुम्हें क्या परेशानी है। तुम एसोसिएशन के साथ विभाग के अफसर भी हो, जो सही जवाब हो वो दो।
तल्ख शब्दों में अली को राज्य में फुटबॉल की बदहाली का जिम्मेदार ठहराया। कहा, आगे से फोन न उठाने की शिकायत मिली तो ऐसी जगह भेजूंगा, जहां वाकई फोन नहीं सुनाई देगा।