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...तो उत्तराखंड में बंद हो जाएंगे खेल छात्रावास
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 27 Dec 2014 02:14 PM IST
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एक तरफ उत्तराखंड सरकार खेल सुविधाओं को बढ़ाने की योजनाएं बना रही है, दूसरी ओर खेल छात्रावासों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
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प्रदेश में देहरादून, हल्द्वानी, पिथौरागढ़, कोटद्वार, पौड़ी और अगस्त्यमुनि में खेल छात्रावास हैं। इनमें विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण लेने वाले 125 खिलाड़ी रहते हैं। अगस्त्यमुनि बालिका खेल छात्रावास है, जहां 25 छात्राएं एथलेटिक्स का प्रशिक्षण ले रही हैं।
कुल छह छात्रावासों में से सिर्फ अगस्त्यमुनि में एक स्थायी कोच है। बाकी जगह एक-एक संविदा प्रशिक्षक के सहारे काम चल रहा है। संविदा प्रशिक्षक भी आए दिन दूसरी जगह भेज दिए जाते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों को बिना प्रशिक्षक ही अभ्यास करना पड़ता है।
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हॉस्टल - खिलाड़ी
देहरादून - 25
हल्द्वानी - 25
पिथौरागढ़ - 20
कोटद्वार - 20
पौड़ी - 10
(पांचों बालक छात्रावासों में न स्थायी प्रशिक्षक हैं, न ही वॉर्डन)
खुराक में कटौती
छात्रावासों में रहने वाले खिलाड़ियों के भोजन में कटौती कर दी गई है। सूत्रों ने बताया कि बढ़ती महंगाई के कारण बदलाव किया गया है। पहले पांच दिन चिकन, मटन मिलता था, अब सिर्फ तीन दिन चिकन दिया जा रहा है। मटन बंद हो गया है। इसी तरह अंडे भी दो वक्त के बजाय एक ही समय दिए जा रहे हैं। दूध के नाम पर भी पानी मिल रहा है।
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यूपी में 250, उत्तराखंड में 80 रुपए
उत्तर प्रदेश सरकार ने छात्रावासों में रह रहे खिलाड़ियों की खुराक 150 से बढ़ाकर 250 रुपए प्रतिदिन करने के आदेश दिए हैं। उत्तराखंड में केवल 80 रुपए मिल रहे हैं। जबकि दोनों जगहों पर ही सहकारिता समिति छात्रावास की कैंटीन चला रही है।
यह सही है कि खिलाड़ियों के लिए 80 रुपए प्रतिदिन का भोजन भत्ता कम है, लेकिन टेंडर नहीं होने के कारण 150 रुपए लागू नहीं कर सके हैं। शासनादेश में बदलाव का प्रस्ताव भेजा गया है। खेल छात्रावासों में दो-दो स्थायी कोच रखने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है।
- शैलेश बगोली, खेल निदेशक