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कोच ने खोले शूटर बिंद्रा के अभिनव बनने के राज
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 20 Jul 2014 12:45 PM IST
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मुझे आज भी वह दिन याद है, जब जुलाई की कड़ी धूप में अभिनव बिंद्रा कई घंटों तक बिना पानी पिए अभ्यास में जुटे रहते थे। सफलता की भूख ने उसे आज इस मुकाम पर पहुंचा दिया है।
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यह कहना है बीजिंग ओलंपिक में गोल्ड मेडल विजेता शूटर अभिनव बिंद्रा के कोच रिटा. कर्नल जेएस ढिल्लों का है। इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय दल की अगुवाई अभिनव बिंद्रा कर रहे हैं।
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इस बात पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि अभिनव होनहार शूटर हैं। इस हप्ते उनसे फोन पर बात हुई थी, तब वह दिल्ली स्थित कैंप में अभ्यास कर रहे थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि वह कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने में जरूर कामयाब होंगे।
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अभिनव के खत ने काफी प्रभावित किया
ढिल्लों ने बताया जब अभिनव 13 साल के थे तो उन्होंने शूटिंग सीखने के लिए खत लिखा था। जिसमें उन्होंने लिखा... सर मुझे शूटिंग में काफी दिलचस्पी है, लेकिन नहीं जानता कि इसमें कैसे कैरियर बनाऊं। उसने आगे लिखा कि मुझे आप ट्रेनिंग दीजिए। मैं कड़ी मेहनत करूंगा।
एक दिन आपको मेरे पर नाज होगा। इस खत में मुझे काफी प्रभावित किया और मैंने उसे अगले ही दिन सेक्टर-35 स्थित अपने आवास पर बुला लिया। घर में बनी शूटिंग रेंज से उसने कैरियर की शुरुआत की। अभिनव ने यहां .1777 जर्मन राइफल से शूटिंग की शुरुआत की।
शूटिंग पहला प्यार
उन्होंने बताया अभिनव बिंद्रा का पहला प्यार शूटिंग है। जब वह शूटिंग कर रहा होता है तो उसके लिए कोई चीज मायने नहीं रखती है। वह कई बार घंटों कड़ी धूप में बिना रुके अभ्यास करता रहता है।
जर्मनी में करते हैं अभ्यास
कोच ने बताया अभिनव ज्यादातर जर्मनी में अभ्यास करते हैं। वहां पर उन्हें विदेशी खिलाड़ियों से कड़ी चुनौती मिलती है।
ये हैं जेएस ढिल्लों
वह खुद शूटिंग के खिलाड़ी रहे हैं। दो बार एशियन गेम्स में भारतीय टीम का नेतृत्व कर चुके हैं। उन्होंने शूटिंग में दो सौ से अधिक पदक जीत चुके हैं। वर्ष 1980 में राष्ट्रपति ने उन्हें विशेष सेवा मेडल देकर सम्मानित किया था।