आखिर क्या है बिंद्रा के 'संन्यास' का सच?
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ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाले एकमात्र भारतीय निशानेबाज अभिनव बिंद्रा के 'संन्यास' की घोषणा पर सब हैरान हैं। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने रियो ओलंपिक में हिस्सा लेने की बात कही है, जिसमें क्वालीफाई करने के लिए उन्हें कई शूटिंग विश्व कप खेलने होंगे। इसका मतलब यह हुआ कि वे प्रोफेशनल शूटिंग से संन्यास लेकर रियो ओलंपिक में खेल ही नहीं सकते।
मंगलवार को 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में हिस्सा लेने से पहले बिंद्रा ने ट्विटर पर कहा था, आज का दिन मेरी पेशेवर शूटिंग जिंदगी का आखिरी दिन होगा।
हालांकि मैं शौकिया तौर पर निशानेबाजी जारी रखूंगा। और सप्ताह में एक-दो दिन ट्रेनिंग करूंगा। और हां, मैं रियो ओलंपिक के लिए तैयारी जारी रखूंगा। मेरे पदकों का खजाना समृद्ध हो चुका है और मुझे उम्मीद है कि इसमें अभी कुछ और पदक आएंगे।’
क्या कहते हैं पिता एएस बिंद्रा
अभिनव के पिता एएस बिंद्रा ने बताया कि टवीटर से ही उन्हें पता चला कि बिंद्रा का ये अंतिम प्रोफेशनल शूटिंग टूर्नामेंट है। वैसे ये उसका अपना फैसला है और जो उसे सही लगता है, वह वही करता है।
वैसे भी जब अभिनव बड़े टूर्नामेंट में खेलता है तो वह परिवार के ज्यादा टच में नहीं रहता। मेरी तो काफी दिन से उससे बात भी नहीं हुई। मंगलवार को एशियन गेम्स के बेटे अभिनव के प्रदर्शन पर वे काफी खुश दिखे। पिछली बार चीन में हुए एशियन गेम्स में बिंद्रा को रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा था।
कोच भी हैरान
उनकी इस घोषणा पर चंडीगढ़ में उनके कोच काफी हैरान हैं। अमर उजाला से विशेष बातचीत में कोच जेएस ढिल्लो ने कहा कि मुझे इसके बारे में नहीं पता।
ये उनकी निजी राय हो सकती है, लेकिन मैंने उन्हें शुरू से ही पांच ओलंपिक खेलने के बारे में कहा था, इनमें से 4 ओलंपिक ये खेल चुके हैं और 2016 में होने वाले रियो ओलंपिक में जरूर खेलेंगे। मैं शुरू से ही उन्हें इन गेम्स में हिस्सा लेने के लिए मोटीवेट करता रहा हूं।
गौर हो कि अभिनव बिंद्रा जब 9 साल के थे, तभी से उन्होंने जेएस ढिल्लो से शूटिंग सीखनी शुरू कर दी थी। ओलंपिक गोल्ड मैडलिस्ट अभिनव को इस मुकाम तक पहुंचाने में ढिल्लो की अहम भूमिका रही है।