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एशियन गेम्स में नाम चमकाने को तैयार ये खिलाड़ी
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Mon, 15 Sep 2014 02:19 PM IST
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बचपन से नरेंदर को स्पोर्ट्स का शौक था। उसके पिता की भी इच्छा थी कि वह इंटरनेशन स्तर पर देश का नाम रोशन करे। 2005 में दुर्घटना में मां-बाप के मौत के बाद आर्थिक तंगी के चलते नरेंदर को सपना अधूरा सा लगने लगा था। उस समय नरेंदर के दोस्त ऋषि पाल ने उसके सपनों को पंख दिए और खेल में कैरियर बनाने के लिए ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में भेजा। साथ ही अर्थिक रूप से सपोर्ट किया।
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स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में कोच नसीम अहमद ने नरेंदर को एथलेटिक्स की ट्रेनिंग लेने लगे। पहले उसने दौड़ में कैरियर बनाना शुरू किया, लेकिन प्रेक्टिस के दौरान उसके पैर में चोट लग गई। डॉक्टर ने दौड़ में हिस्सा लेने के लिए मना कर दिया। उस समय नरेंदर का कैरियर पीक पर था। उस समय एथलेटिक्स कोच ने नरेंदर का हौसला बढ़ाया और जैवलिन थ्रो में आगे बढ़ाया।
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हिम्मत और जज्बे से 2012 में नरेंदर ने पैरा ओलंपिक गेम्स के जैवलिन थ्रो इवेंट में छठा रैंक हासिल किया। इस उपलब्धि के लिए उसे 11 लाख रुपये का कैश प्राइज मिला था। इसके बाद नरेंदर ने अपने कैरियर में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। नरेंदर मूलरूप से पानीपत के पलड़ी गांव का रहने वाला है।
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ट्राइसिटी से केवल नरेंदर का चयन
नरेंदर का 18-24 अक्टूबर को दक्षिण कोरिया में होने वाले एशियन गेम्स में चयन हुआ है। प्रदेश से सात खिलाड़ियों को चयन किया गया है, जिममें ट्राइसिटी से सिर्फ नरेंदर का चयन हुआ है। एक से तीन फरवरी 2014 को बंगलूरू के कटेरवा स्टेडियम में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया था।
इस उपलब्धि के बाद नरेंदर का चयन एशियन गेम्स के किया गया। नेशनल में नरेंदर ने स्वर्ण पदक जीता था। उसके बाद इसी एशियन गेम्स के लिए 12-13 अगस्त को ट्रायल बेस सलेक्शन हो गया। इसमें अच्छा प्रदर्शन करने के लिए नरेंदर रोजान छह घंटे प्रेक्टिस करता है।
ये हैं उपलब्धियां
-एक से तीन फरवरी 2014 में बंगलूरू में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप के सीनियर कैटेगरी में स्वर्ण पदक
-29 से 31 जनवरी 2013 को जयपुर में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप के सीनियर कैटेगरी में स्वर्ण पदक
-29 जुलाई से 7 अगस्त तक 2013 फ्रांस में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में चौथा स्थान
-29 से 9 सितंबर को 2012 में आयोजित पैरा ओलंपिक में छठा स्थान