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टी-20 वर्ल्ड कप में कंगारू भी साबित हुए 'चोकर्स'
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 03 Apr 2014 01:28 AM IST
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यूं तो क्रिकेट जगत में अब तक दक्षिण अफ्रीका को 'चोकर्स' माना जाता रहा है। लेकिन टी-20 क्रिकेट में ऑस्ट्रेलियाई टीम अब तक बढ़िया प्रदर्शन नहीं कर सकी है। चोकर्स का अर्थ होता है कि अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीम बड़े मुकाबलों में लगातार खराब खेल दिखाएं।
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बांग्लादेश में इस समय टी-20 वर्ल्ड कप का पांचवां संस्करण खेला जा रहा है और पिछले चार संस्करणों में कंगारू टीम को खाली हाथ ही लौटना पड़ा है।
हालांकि 2009 में वह फाइनल में पहुंचने में कामयाब रही लेकिन तब खिताबी जंग में इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को सात विकेट से हराकर पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था।
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ऑस्ट्रेलिया का 2007- 2012 तक का सफर
टी-20 वर्ल्ड कप का पहला संस्करण 2007 में दक्षिण अफ्रीका में खेला गया जिसमें भारत चैंपियन बना था। सेमीफाइनल में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर उसका सफर खत्म किया था।
इसके बाद 2009 में इंग्लैंड में हुए वर्ल्ड कप में भारत की तरह ऑस्ट्रेलियाई टीम भी सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी।
हालांकि 2009 में वेस्ट इंडीज में हुए टी-20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया फाइनल तक पहुंच गया था लेकिन इंग्लैंड ने उसे 7 विकेट से हरा दिया। 2012 में श्रीलंका में हुए वर्ल्ड कप में कंगारू टीम एक बार फिर अंतिम चार में पहुंचने में सफल रही लेकिन उसका सफर यहीं पर खत्म हो गया।
इसके बाद 2009 में इंग्लैंड में हुए वर्ल्ड कप में भारत की तरह ऑस्ट्रेलियाई टीम भी सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी।
हालांकि 2009 में वेस्ट इंडीज में हुए टी-20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया फाइनल तक पहुंच गया था लेकिन इंग्लैंड ने उसे 7 विकेट से हरा दिया। 2012 में श्रीलंका में हुए वर्ल्ड कप में कंगारू टीम एक बार फिर अंतिम चार में पहुंचने में सफल रही लेकिन उसका सफर यहीं पर खत्म हो गया।
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इस बार बुरी तरह से फ्लॉप हो गए कंगारू
भले ही पिछले चार मौकों पर ऑस्ट्रेलिया तीन बार सेमीफाइनल में पहुंच गया हो लेकिन एक बार भी वह खिताब जीतने में कामयाब नहीं हो सका है।
जबकि वनडे में रिकॉर्ड चार बार वर्ल्ड कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई 20-20 ओवर के प्रारूप में अब तक खिताब नहीं जीत सकी है। टेस्ट और वनडे में विपक्षी टीमों को जमकर चुनौती देने वाली कंगारू टीम टी-20 में कहीं असफल हो जाती है।
बांग्लादेश में खेले जा रहे वर्ल्ड कप में तो ऑस्ट्रेलिया का खेल बेहद निराश करने वाला रहा और वह भी तब जब उसने अपने घर में इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका को उसी की धरती पर हराकर यहां आई थी। ऑस्ट्रेलिया को चार मैचों से महज एक में जीत मिली।
जबकि वनडे में रिकॉर्ड चार बार वर्ल्ड कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई 20-20 ओवर के प्रारूप में अब तक खिताब नहीं जीत सकी है। टेस्ट और वनडे में विपक्षी टीमों को जमकर चुनौती देने वाली कंगारू टीम टी-20 में कहीं असफल हो जाती है।
बांग्लादेश में खेले जा रहे वर्ल्ड कप में तो ऑस्ट्रेलिया का खेल बेहद निराश करने वाला रहा और वह भी तब जब उसने अपने घर में इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका को उसी की धरती पर हराकर यहां आई थी। ऑस्ट्रेलिया को चार मैचों से महज एक में जीत मिली।
अंतिम मैच में जाकर मिली पहली सफलता
ट्वंटी-20 वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल की होड़ से पहले ही बाहर हो चुकी ऑस्ट्रेलिया को पहले तीनों मैचों में हार मिली थी। उसे अपने अभियान का अंतिम मैच मेजबान बांग्लादेश के खिलाफ खेलना था जिसमें उसे सात विकेट से जीत हासिल हुई।
ग्रुप-दो में शामिल ऑस्ट्रेलिया की चार मैचों में यह पहली जीत है और इससे वह अंक तालिका में दो अंकों के साथ चौथे स्थान पर रही। बांग्लादेश का निराशाजनक प्रदर्शन जारी रहा और वह टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं जीत सका।
बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और पांच विकेट पर 153 रन का सम्मानजनक स्कोर बनाया। जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने ओपनर एरोन फिंच के ताबड़तोड़ अर्द्धशतक से 17.3 ओवर में तीन विकेट पर 158 रन बनाकर जीत हासिल कर ली। ‘मैन ऑफ द मैच’ बने फिंच ने 47 गेंदों में सात चौकों और चार छक्कों के साथ 71 रन की धुआंधार पारी खेली।
ग्रुप-दो में शामिल ऑस्ट्रेलिया की चार मैचों में यह पहली जीत है और इससे वह अंक तालिका में दो अंकों के साथ चौथे स्थान पर रही। बांग्लादेश का निराशाजनक प्रदर्शन जारी रहा और वह टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं जीत सका।
बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और पांच विकेट पर 153 रन का सम्मानजनक स्कोर बनाया। जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने ओपनर एरोन फिंच के ताबड़तोड़ अर्द्धशतक से 17.3 ओवर में तीन विकेट पर 158 रन बनाकर जीत हासिल कर ली। ‘मैन ऑफ द मैच’ बने फिंच ने 47 गेंदों में सात चौकों और चार छक्कों के साथ 71 रन की धुआंधार पारी खेली।