{"_id":"2148b156a401c78d5de5fe91912728aa","slug":"no-facility-for-cricket-player-in-deharadun","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिर्फ दो बल्लों से तैयार हो रहे भविष्य के क्रिकेटर!","category":{"title":"Sports Archives","title_hn":"खेल आर्काइव","slug":"sports-archives"}}
सिर्फ दो बल्लों से तैयार हो रहे भविष्य के क्रिकेटर!
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 27 Jun 2014 05:01 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक तरफ तो उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट स्टेडियम बनने का काम चल रहा है, वहीं भविष्य के क्रिकेटर सुविधाओं के लिए मोहताज हैं। न उनके पास मैदान है, न ही खेल सामग्री।
विज्ञापन
इसके बावजूद राज्य खेल विभाग युवाओं से धौनी, युवराज जैसे हुनर की उम्मीद लगा रहा है।
खेलने तक की जगह नहीं
जिला खेल कार्यालय परेड ग्राउंड में भविष्य के युवा क्रिकेटरों को प्रशिक्षण देता है। इसके लिए प्रशिक्षित कोच भी संविदा पर नियुक्त किया गया है। खिलाड़ियों के पास खेलने तक के लिए जगह ही नहीं है।
विज्ञापन
परेड ग्राउंड में खेल परिसर के निर्माण के बाद ही क्रिकेट की नई पिच मिलेंगी। सत्र 2014-15 में अब तक परेड ग्राउंड में 28 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है। जबकि यहां 50 से अधिक खिलाड़ी बगैर रजिस्ट्रेशन के भी खेलने पहुंचते हैं।
विज्ञापन
न बल्ला न गेंद
खेल विभाग से हर महीने सिर्फ 18 गेंद खिलाड़ियों को मिलती है, जबकि सिर्फ दो बैट से सभी खिलाड़ियों को काम चलाना पड़ता है।
विभाग का कहना है कि खेल सामग्री की यह सूची करीब 10 साल पहले अपर सचिव आरके चतुर्वेदी के समय तैयार हुई थी।
फर्स्ट ऐड तक की सुविधा नहीं
सूत्रों के अनुसार खेल सामग्री की संख्या बढ़ाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन सही पैरवी न हो पाने से यह प्रस्ताव भी अधर में ही रह गया। ऐसे में खिलाड़ियों को चोट लगने से बचने के इंतजाम खुद करने पड़ते हैं।
जिला खेल अधिकारी सतीश सारकी बताते हैं कि शासनादेश में जितना प्रावधान है, उतनी ही खेल सामग्री खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जाती है।