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फुटबाल वर्ल्डकप के बीच इस राष्ट्रीय कोच का कड़वा सच

Sat, 21 Jun 2014 08:19 AM IST
कुलदीप चहल/अमर उजाला, अंबाला
कुलदीप चहल/अमर उजाला, अंबाला Updated Sat, 21 Jun 2014 08:19 AM IST
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National Football Coach Selling Tea on Road

एक तरफ जहां दुनियाभर के खेलप्रेमी फीफा फुटबाल कप का आनंद ले रहे हैं, वहीं, भारत की फुटबाल खिलाड़ियों की हालत देखिए, एक नेशनल फुटबाल कोच चाय की रेहड़ी लगा रहा है।

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यह कोच एनआईएस (नेशनल इंस्टीट्यूट आफ स्पोर्ट्स) से बतौर कोच पास आउट है। इसके अलावा एक नेशनल खिलाड़ी मोबाइल रीचार्ज शॉप से अपना घर चला रहा है।

सरकारी मदद न मिलने के कारण इन दोनों के लिए यह हालात हैं, लेकिन फुटबाल का जुनून इस कदर है कि आज भी इस खेल से जुड़े हैं। इतना ही नहीं एक तो अपने बेटे को इसी खेल में कैरियर बनाने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। मामला, हरियाणा के अंबाला जिले का है।

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मिलिए, फुटबाल खिलाड़ी व कोच से

National Football Coach Selling Tea on Road

फुटबाल खिलाड़ी व कोच संजीव विज ने बताया कि उन्होंने 14 साल की उम्र से फुटबाल खेलनी शुरू की। सबसे पहले अंडर-15 में खेले और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अंबाला में हीरोज़, लायंस, आर्यंस क्लब के लिए खेले। इसके बाद हरियाणा टीम में चयन हुआ। खेल के दौरान सरकारी नौकरी की भी कोशिश की।

इसी दौरान कोच की ट्रेनिंग के लिए उन्होंने एनआईएस ज्वाइन किया। लेकिन फीस अदा करने के लिए उनके पिता जी ने फ्रूट की पेटियां रखकर चाय का ठेला लगाया और फीस अदा की।

लेकिन आज हालात यह हैं कि चाय की दुकान चलानी पड़ रही है, जबकि सरकारी मदद भी नहीं मिल पाई। अब दो क्लबों को कोचिंग देते हैं और कभी टूर्नामेंट में बतौर रेफरी जाते हैं, जिससे थोड़ी बहुत आमदनी हो जाती है।

नेशनल प्लेयर भी अनदेखी का शिकार

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इसी तरह नेशनल प्लेयर जंगबहादुर, जिन्होंने संतोष ट्राफी में हरियाणा की ओर से भाग लिया, भी इसी अनदेखी का शिकार हैं। बारह साल की उम्र से फुटबाल खेलना शुरू किया, जो आज भी जारी है। लेकिन इन बीते सालों में कभी भी सरकार की ओर से कुछ नहीं मिला। उन्होंने बताया कि जॉब के लिए भटकते रहे, लेकिन न तो सिफारिश थी और न ही पैसा, जिसके कारण समय बीतता चला गया।

उन्होंने बताया कि हार कर परिवार चलाने के लिए मोबाइल रीचार्ज की शॉप शुरू की। अब इसी से परिवार का पालन पोषण चल रहा है। उन्होंने बताया कि फुटबाल का जुनून कुछ ऐसा है कि हमारा जो सपना पूरा नहीं हुआ, वह बेटा करेगा। इसी उम्मीद के साथ उन्होंने अपने बेटे रोहित, जो नौंवी कक्षा में पढ़ रहा है, को फुटबाल खेल में डाला है।

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