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पहाड़ चढ़ते-उतरते बन गए 50 किमी वॉकर
अंशुल डांगी/अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 09 Apr 2014 01:45 PM IST
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पहाड़ के ऊंचे-नीचे रास्तों पर चढ़ते-उतरते स्कूल जाना। फिर शाम को प्रैक्टिस के लिए चार किलोमीटर पैदल चलना। बचपन से जवानी तक चला यह सिलसिला पहले तीन हजार मीटर की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पुलिस की पहचान बना और अब 50 किलोमीटर पैदल चाल में देश का प्रतिनिधित्व करने की वजह।
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बात कर रहे हैं उत्तराखंड पुलिस में कांस्टेबल पद पर तैनात एथलीट मनीष रावत की। मनीष को 3 मई से चीन में शुरू हो रही वर्ल्ड वॉकिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में चुना गया है।
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चमोली जिले के मुख्यालय गोपेश्वर के पास सगर गांव निवासी मनीष रावत ने नेशनल पैदल चाल चैंपियनशिप-2014 में 4 घंटे 9 मिनट का वक्त निकाल रजत पदक तो जीता ही साथ ही वर्ल्ड वॉकिंग चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई भी कर लिया।
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पैदल आना-जाना आदत
बंगलूरू स्थित नेशनल कैंप में ट्रेनिंग कर रहे मनीष ने फोन पर अमर उजाला को बताया कि उन्होंने 7 साल की उम्र से दौड़ना शुरू किया। स्कूल पैदल आना-जाना था, इसलिए चलने की आदत थी।
स्कूल स्तर पर 3 हजार, 5 हजार मीटर दौड़ में हिस्सा लेता था। प्रैक्टिस करने जिला खेल कार्यालय गोपेश्वर आता था। वर्ष 2007 में यहां तैनात कोच अनूप बिष्ट ने कोचिंग की पेशकश करते हुए लंबी रेस की तैयारी करने के लिए कहा।
वर्ष 2010 में अनूप का पिथौरागढ़ ट्रांसफर होने पर मनीष उनके साथ आ गए। इस बीच नॉर्थ जोन एथलेटिक्स में मनीष ने गोल्ड जीता।
मनीष ने बताया कि अंडर-20 वर्ग में 10 किलोमीटर, फिर 20 किलोमीटर की जानकारी मिली और अब 50 किलोमीटर में प्रतिभाग कर रहा हूं। कोच अनूप बिष्ट ने बताया कि इस प्रतियोगिता का प्रदर्शन अनूप के लिए एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक के रास्ते खोलेगा।
मित्र पुलिस नहीं कर सकी सम्मान
उत्तराखंड पुलिस के पंकज डिमरी, रवींद्र रौतेला, मनीष रावत ने अपने खेल से उत्तराखंड और पुलिस का नाम रोशन किया है। मगर विभाग ने सैलरी के अलावा उन्हें आज तक कोई सम्मान नहीं दिया। मनीष ने बताया कि 2011 में भर्ती होने के बाद पहले ही साल ऑल इंडिया पुलिस एथलेटिक्स मीट में कांस्य जीता।
अगले साल गोल्ड मेडल हासिल किया। 2013 में सीनियर नेशनल एथलेटिक्स मीट में 50 किलोमीटर पैदल चाल में 4 घंटे 13 मिनट वक्त निकाल रजत जीता था। 2014 में भी रजत जीतने में सफलता प्राप्त की। मगर आज तक कांस्टेबल पद से प्रमोशन नहीं मिला। नियमानुसार मेडल जीतने पर प्रमोशन दिया जाता है।