बदल रहा है फुटबाल, ISL से बहुत सीखा: मनीष
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अद्भुत, शानदार और क्या कहूं, इंडियन सुपर लीग(आईएसएल) में तीन महीने का सफर बहुत शानदार रहा। जिनको कभी टीवी पर खेलते देखकर खेलता था, उनके साथ खेलने का मौका मिला। बहुत कुछ सीखने को मिला।
यह एक विश्वस्तरीय टूर्नामेंट था, जहां हर दिन कोई भी किसी को चौंका रहा था, लेकिन मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और सीखा। आईएसएल के अंतिम मैच में केरल के खिलाफ इमरजिंग प्लेयर ऑफ द मैच से नवाजे गए उत्तराखंड के मनीष मैठाणी ने सोमवार को दून पहुंचकर अपनी भावनाओं को कुछ इस तरह बयां किया।
आईएसएल में पुणे एफसी सिटी का सफर समाप्त होने के बाद कोलकाता लौटने से पहले देहरादून पहुंचे टीम के मिड फील्डर मनीष मैठाणी ने बताया कि यह फुटबाल में बदलाव की शुरुआत है।
टूर्नामेंट के दौरान मुझे इंग्लैंड के स्टार खिलाड़ी पेनिन के साथ रहने का मौका मिला। वहीं अन्य अंतरराष्ट्रीय फुटबाल खिलाड़ियों के साथ खेलने और उनका खेल देखकर सीखने का अवसर मिला। हालांकि चोट के कारण उनको करीब एक महीने तक टूर्नामेंट से बाहर रहना पड़ा। मगर अच्छे फिजियो और डॉक्टर्स की मदद से उन्होंने जल्द वापसी की। लीग से पहले मनीष ने इटली में 15 दिन के शिविर में भी प्रतिभाग किया। उनका मानना है कि आईएसएल ने युवाओं के सामने रोजगार का भी नया स्रोत खोल दिया है, जहां 3 महीने में खिलाड़ी करोड़ों कमा सकता है।
घरेलू टीम के खिलाफ खेलना चुनौती
कोलकाता में ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के मैच के दौरान लाख से अधिक दर्शकों के बीच मैं खेल चुका हूं, लेकिन वहां दोनों टीमों के दर्शक होते हैं, जो चीयर भी करते हैं। मगर आईएसएल में घरेलू दर्शकों की मौजूदगी में खेलना सबसे बड़ी चुनौती था। जहां घरेलू टीम की भरपूर हौसला अफजाई होती थी, लेकिन मेहमान टीम की नहीं। केरल के खिलाफ 63 हजार दर्शकों के बीच खेलने का अनुभव बहुत रोमांचक था।
उत्तराखंड में ग्रास रूट मजबूत करने की जरूरत
मनीष मैठाणी का कहना है कि उत्तराखंड में भी फुटबाल की नई पौंध शानदार है। मगर ग्रास रूट को मजबूत करने की जरूरत है। इसके लिए स्पोर्ट्स कालेज, फुटबाल हॉस्टल में कोच और सुविधाएं बढ़ाए जाने की जरूरत है। उनका कहना है कि एक कोच 30 खिलाड़ियों को पर्याप्त समय नहीं दे सकता।
हर खिलाड़ी का नेचर अलग होता है, इसलिए कोच को खिलाड़ी को समझने की भी जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि राज्य में चार स्पोर्ट्स हॉस्टल, कई क्लब और स्पोर्ट्स कालेज होने के बावजूद अच्छे खिलाड़ियों का नहीं निकल पाना चिंता जनक है। कुछ अच्छे खिलाड़ी निकल भी रहे हैं तो सुविधा और प्रशिक्षण के अभाव में मात खा जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस उम्र में नेमार और मेसी जैसे खिलाड़ी विश्व कप खेल चुके हैं उस उम्र में यहां के खिलाड़ी क्लब और अकेडमी से जुड़ रहे हैं, जो उनकी सफलता में सबसे बड़ा रुकावट का काम करता है।
तो आई लीग में इस बार कौन सा क्लब
जनवरी से देश में आई लीग भी शुरू होने जा रही है, इससे पहले फेडरेशन कप भी खेला जाना है। जिसके लिए मनीष के पास देश के नामी प्रोफेशनल फुटबाल क्लबों से ऑफर भी आने लगे हैं। मनीष ने बीते आई लीग सत्र में मोहम्मडन स्पोर्टिंग से खेला था, जबकि उससे पहले मोहन बागान से मनीष खेलते रहे हैं। लेकिन नए सत्र में अभी क्लब तय नहीं हो सका है। सूत्रों की मानें तो इस बार भारत एफसी नाम से नया क्लब आईलीग में शामिल हो रहा है। जिसका ऑफर भी मनीष को मिला है