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लंबी दूरी के धावकों की खान बन सकता है उत्तराखंड

Sun, 08 Mar 2015 12:58 PM IST
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 08 Mar 2015 12:58 PM IST
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long racer in uttarakhand.

राष्ट्रीय खेल 2015 में उत्तराखंड के रवींद्र रौतेला ने 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण, तो गुरमीत सिंह ने 20 किलोमीटर वॉक रेस में कांस्य पदक जीतकर राज्य का मान बढ़ाया है।

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मनीष रावत को वर्ल्ड वॉकिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में चुना गया है। वर्तमान में देश के टॉप-10 धावकों में 75 फीसदी उत्तराखंड के धावक हैं। अब भी प्रदेश में प्रतिभाओं की कमी नहीं। विशेषज्ञों की मानें तो सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी और हाई एल्टीट्यूड सेंटर खुलने से उत्तराखंड लंबी दूरी के धावकों की खान बन सकता है।
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सही मार्गदर्शन मिलने पर बढ़ेंगे आगे
हरीश कोरंगा, पंकज रौतेला, नितेंद्र रावत, आदि भारतीय एथलेटिक्स टीम के वे चेहरे हैं, जिनको लंबी दूरी की दौड़ और पैदल चाल का बादशाह माना जाता है। सर्विसेज के चंदन सिंह, मान सिंह भी उत्तराखंड के हैं, जो राष्ट्रीय खेलों में पदक जीत चुके हैं।
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गैरसैंण एक्सप्रेस के नाम से मशहूर सुरेंद्र सिंह भंडारी कहते हैं कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थिति युवाओं को खुद तैयार कर देती है। सही मार्गदर्शन मिलने पर वे आगे बढ़ सकते हैं। खासकर चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, बागेश्वर आदि जिलों में चलना बहुत पड़ता है, जो लंबी दूरी के लिए सही है। बता दें कि भंडारी के नाम पर 10 हजार मीटर दौड़ का नेशनल रिकॉर्ड है।

खेल विभाग के कोच अनूप बिष्ट भी मानते हैं कि पहाड़ के युवाओं की शारीरिक क्षमता बहुत मजबूत होती है। जूनियर स्तर पर भी कुछ खिलाड़ी सामने आ रहे हैं, जिनको स्कूल स्तर से ही तैयार करना जरूरी है, तभी वे आगे बढ़ सकें। इसके लिए खेल हॉस्टल, स्पोर्ट्स कालेज के साथ ही स्कूलों को भी प्रयास करना होगा।

एक्सीलेंस और हाई एल्टीट्यूड सेंटर के फायदे
सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी में अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों के लिए खिलाड़ी तैयार होते हैं। यहां हॉस्टल, डाइट, विशेषज्ञ कोच, फिजियोथेरेपिस्ट, खेल विज्ञान आदि सुविधाएं दी जाती हैं।


जिस दौड़ का खिलाड़ी, उसे उसी में बेहतर बनाना, वीडियो फुटेज के जरिये खिलाड़ियों की कमियों को बताना आदि होता है। हाई एल्टीट्यूड सेंटर खिलाड़ियों को विषम परिस्थिति में खुद को ढालने और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का काम करता है।

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