{"_id":"677fb46654914f76d4e1ae21d730bb3c","slug":"interview-of-lekha-kc-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मैरी काम संग जीता सोना पर देश में पूछ नहीं","category":{"title":"Sports Archives","title_hn":"खेल आर्काइव","slug":"sports-archives"}}
मैरी काम संग जीता सोना पर देश में पूछ नहीं
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, थ्रिसूर
Updated Fri, 13 Feb 2015 11:26 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बॉक्सिंग के रिंग में मैरी काम, जेनी के साथ वर्ल्ड चैंपियनशिप का गोल्ड मेडल हासिल करने के बावजूद केरल की लेखा केसी उपेक्षित है।
विज्ञापन
2010 में नेशनल में फिर चैंपियन बनीं
खास यह कि वह दो बच्चों की मां बनने के बाद साल 2010 में नेशनल में फिर चैंपियन बनीं। मगर आज यह गोल्ड मेडलिस्ट अनदेखी की शिकार है, जबकि जेनी, मैरी कॉम, सरिता देवी को कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
35वें राष्ट्रीय खेलों के तहत बॉक्सिंग प्रतियोगिता में बतौर ऑफिशियल पहुंची लेखा केसी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में की। बताया कि नौंवी कक्षा से ही उन्होंने गोला और हैमर थ्रो में प्रतिभाग करना शुरू किया। 2001-02 में श्रीनारायण कालेज में डिग्री की पढ़ाई के दौरान फिजिकल एजुकेशन के हेड पीके जगन्नादन के कहने पर साई सेंटर कोल्लम में लगे कैंप में गई।
विज्ञापन
तब न तो पूरे नियम की जानकारी थी और न खेल की। 3-4 दिन सीनियर खिलाड़ियों को खेलते हुए देखा, जिसके बाद पंच मारने का अभ्यास किया। नेशनल के लिए 75 से 81 किलो भार वर्ग में ट्रायल दिया और सीधे नेशनल कैंप के लिए चयन हो गया। उसी साल नेशनल बॉक्सिंग प्रतियोगिता में गोल्ड जीता और 2002 नेशनल गेम्स में भी स्वर्ण जीता।
विज्ञापन
इसके बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन गेम्स सहित कई टूर्नामेंट खेले। टर्की, कनाडा, इटली, में ट्रेनिंग कम कंपटीशन व इन्विटेशन टूर्नामेंट में 7 स्वर्ण, 2 रजत और 5 कांस्य उनके नाम हैं। जबकि नई दिल्ली में 2006 में हुई चौथे वूमेन वर्ल्ड एमेच्योर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 75 किलो भार वर्ग में सोना जीता।
तब मैरी कॉम, जेनी आरएल, सरिता देवी ने भी स्वर्ण जीता था। लेखा केसी ने बताया कि 2007 में केरल सरकार ने राज्य के सबसे बड़े खेल सम्मान जीवी राजा अवॉर्ड दिया। वे केरल सचिवालय में काम कर रहीं हैं। केंद्र सरकार और खेल मंत्रालय ने उपेक्षित रखा।
कई बार पुरस्कार के लिए आवाज उठा चुकी हैं, लेकिन आज तक उनकी सुनवाई नहीं हो सकी। उपेक्षा से आहत होकर 2008 में शादी के बाद रिंग छोड़ने वाली लेखा केसी ने 2010 में रिंग में वापसी की और 81 किलो भार वर्ग में सीनियर महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर अपना जलवा बिखेरा और 2011 नेशनल गेम्स झारखंड में रजत पदक जीतकर जज्बा दिखाया।
बताया कि उनके दो बच्चे करनजीत और कीर्तना हैं, जो कुछ बड़े हो जाएं तो फिर एनआईएस करेंगी। वह नई खिलाड़ियों को भी ट्रेंड करना चाहती हैं।