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मेहनत के दम पर उत्तराखंड की बेटी पहुंची ‘बार्सिलोना’

Wed, 08 Oct 2014 03:04 PM IST
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 08 Oct 2014 03:04 PM IST
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football coach monika bisht.

उधार की किट, पड़ोसियों के तंज के बीच कुछ पाने की जिद ने आखिर उत्तराखंड की मोनिका बिष्ट के कदम फुटबॉल क्लबों के लिए मशहूर बार्सिलोना के गुड़गांव स्थित एकेडमी तक पहुंचा दिए हैं।

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दून की इस बेटी को बार्सिलोना के एफसी बिस्कोला फुटबॉल एकेडमी ने कोच के तौर पर चुना है। नवंबर में मोनिका एकेडमी से जुड़ जाएंगी। मोनिका को उत्तराखंड की पहली नेशनल इंस्टीट्यूट आफ स्पोर्ट्स (एनआईएस) प्रशिक्षित महिला फुटबॉल कोच होने का गौरव भी प्राप्त है।
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अमर उजाला से खास बातचीत में जिला खेल कार्यालय में कोच मोनिका (24) ने बताया कि आठ साल पहले महिंद्रा ग्राउंड में लगे समर कैंप से उनके फुटबॉल खेलने की शुरुआत हुई थी।
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फुटबॉलर रतन थापा ने गुर सिखाए जो उन्हें हॉस्टल की वर्दी भी देते थे। बताया कि स्पोर्ट्स शूज में खेल रही लड़कियों को तब फुटबॉल क्लब विजय कैंट के खिलाड़ियों ने अपने जूते दिए थे।

वर्ष 2013 में पटियाला से एनआईएस कोच बनने के बाद मोनिका ने पहले दून के यूनिसन वर्ल्ड स्कूल में कोचिंग दी।

जब टूटने लगा था सपना

football coach monika bisht.

इसके बाद जिला खेल कार्यालय में संविदा कोच के रूप में मोनिका का चयन हुआ। मोनिका ने बताया कि जुलाई में वेल्हम ब्वॉयज स्कूल में लगे गुड़गांव स्थित बार्सिलोना बिस्कोला एकेडमी के कैंप में उन्हें वहां कोच की जरूरत की जानकारी मिली।

अगस्त में लिखित परीक्षा और फील्ड ट्रायल हुआ और अब कोच बनने का आफर मिल गया है। बताया कि उन्हें नवंबर तक एकेडमी ज्वाइन करनी है। ऑफर के तहत तीन से चार लाख का वार्षिक पैकेज और साल में एक बार स्पेन के बार्सिलोना शहर जाने का मौका मिलेगा।

मोनिका ने बताया कि जैंतनवाला गांव से वह हर सुबह चार बजे साइकिल पर महिंद्रा ग्राउंड पहुंचती थी और लड़कों के साथ फुटबाल खेलती थीं। गांव वाले भी लड़की होने के बावजूद फुटबॉल खेलने पर तंज कसा करते थे।

ऐसे में 2012 में एक बार खेल छोड़ने का मन बना लिया था। लेकिन फिर प्रोफेशनल कोच बनने की राह पर कदम बढ़ाए और आज उनका सपना पूरा हो गया है।

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