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ऑटो चालक की बेटी बनी दून की पहली महिला रेफरी

Wed, 23 Apr 2014 01:09 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 23 Apr 2014 01:09 PM IST
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first lady football referee

गर्ल्स चैलेंज कप फुटबॉल प्रतियोगिता के दूसरे दिन देहरादून के पवेलियन ग्राउंड में पहली बार लेडी रेफरी ने मैदान में कदम रखे।

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अब अपने बूते बीपीएड करना है
तीसरे रेफरी भूमिका में उतरीं सुचिता के फैसलों के लिए टीमों ने भी मैच के बाद उनकी भरपूर सराहा। दून फुटबॉल के इतिहास की पहली महिला रेफरी बनकर मैदान में उतरी सुचिता का मकसद अब अपने बूते बीपीएड करना है।

गढ़ी कैंट की रहने वाली सुचिता खरोला अभी 21 साल की हैं, लेकिन फुटबॉल के जुनून ने उन्हें रेफरी बनने के लिए प्रोत्साहित किया।

जिले में गर्ल्स फुटबॉल की बदहाल स्थिति और घर की आर्थिक स्थिति देख सुचिता ने कई बार खेल छोड़ने का मन बनाया। मगर वे फुटबॉल से दूर नहीं हो सकीं।

मंगलवार को नैनीताल और यूनीसन वर्ल्ड स्कूल के मैच में सुचिता बतौर लाइन रेफरी की भूमिका में नजर आई। मैच के बाद सुचिता ने बताया कि 10 साल की उम्र में फुटबॉल खेलना शुरू किया था।
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लड़कों के साथ खेलकर खेल सुधारा
महिंद्रा ग्राउंड में विजय कैंट फुटबॉल क्लब कैंप से शुरुआत हुई थी। लड़कों के साथ धीरे-धीरे खेलकर खेल सुधारा। तीन नेशनल प्रतियोगिता खेल चुकी सुचिता स्कूल नेशनल भी खेल चुकी हैं।
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स्टेट लेवल के तीन खिताब भी जीते हैं। बीए कर चुकी सुचिता एमए राजनीति शास्त्र की पढ़ाई कर रही हैं। पिता ऑटो चालक हैं और चार भाई बहनों में सुचिता दूसरे नंबर पर हैं। बड़ी बहन सिलाई सिखाती हैं।

सुचिता खुद काम करना चाहती हैं। उनका सपना अपनी कमाई के बूते बीपीएड करने का है। इसके लिए वह रेफरी बनीं और कोचिंग भी दे रही हैं।

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