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रोनाल्डो, नेमार बनना चाहती हैं चंडीगढ़ की फुटबॉलर्स

Sun, 15 Jun 2014 08:11 AM IST
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 15 Jun 2014 08:11 AM IST
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Fifa World Cup fever on Chandigarh Girl Footballers

फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए भले ही भारतीय टीम क्वालीफाई न कर पाती हो और एशिया के टॉप टेन में भी हमारे लड़के टीम को न ला पाए हों मगर दमखम के इस खेल में चंडीगढ़ की बेटियां देश की शान बनने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रही हैं।

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फीफा वर्ल्ड कप ने इनका जोश दोगुना कर दिया है। यह मैदान में भी दिख रहा है। खेल के लिए वे तानों की परवाह भी नहीं करतीं। इनमें कोई रोनाल्डो की तरह बनना चाहती है तो कोई नेमार।
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पांच साल पहले कोई खेलने को राजी नहीं थी

कोच भूपिंदर सिंह के अनुसार जीएमएसएसएस-22 में तीन बैच में 68 लड़कियां फुटबॉल की ट्रेनिंग ले रही हैं। अंडर-14, 17 और अंडर-19 के तीन बैच में 18-18 लड़कियां हैं। यह अकादमी 2009 में शुरू हुई थी। तब कोई भी लड़की आने को राजी नहीं थीं।
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स्कूल की प्रिंसिपल प्रोमिला दास ने लड़कियों को प्रेरित किया कि जब सानिया मिर्जा लड़की होकर अपने खेल से नाम रोशन कर सकती है तो आप क्यों नहीं। इसके बाद तो लड़कियों ने इतना उत्साह दिखाया कि स्कूल 2009 से लेकर 2013 तक लगातार इंटर स्कूल अंडर-14 चैंपियन रहा।

मां कहती थी-मुंडैया दा खेल ए..

Fifa World Cup fever on Chandigarh Girl Footballers

जीएमएसएसएस-22 की दसवीं की छात्रा अंजली भी फुटबॉल की ट्रैनिंग ले रही हैं। अंजली ने बताया कि पहले मां टोकती थी कि यह तो लड़कों का खेल है। इसमें लड़कियों का क्या काम है।

मगर पिता ने साथ दिया। वह ही मुझे रोज ट्रैनिंग के लिए छोड़ने आते हैं। यह चैलेंजिग गेम है इसलिए मैने इसे चुना है। अंजली के अनुसार अर्जेटीना मेरे फेवरेट टीम और मैसी मेरे पंसदीदा खिलाड़ी है।

रोनाल्डो से मिली सीखने की प्रेरणा

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नौंवीं की छात्रा दीपशिखा भी दो साल से फुटबॉल खेल रही हैं। पुर्तगाल उनकी फेवरेट टीम है। दीपशिखा के लिए रोनाल्डो सबसे स्टाइलिश खिलाड़ी है। वह जिस तरह से गेंद लेकर आगे बढ़ता है, उसे कॉपी करने की कोशिश करती हैं।

सॉपिंस से 11 नेशनल खिलाड़ी
सॉपिंस स्कूल-32 में दो बैच में 60 लड़कियां फुटबॉल की ट्रैनिंग ले रही हैं। कोच पूजा के अनुसार अंडर-14 और अंडर-17 के दो बैच में 30-30 लड़किया हैं। पिछले साल से इस बार लड़कियों की संख्या दोगुनी है। पूजा के अनुसार स्कूल से अब तक 11 लड़कियां राष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल खेल चुकी हैं।

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