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छह स्पोर्ट्स हॉस्टल तो संभलते नहीं, आठ और खुलेंगे

Mon, 07 Dec 2015 04:12 PM IST
हिमांशु जोशी/ अमर उजाला, हल्द्वानी
हिमांशु जोशी/ अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Mon, 07 Dec 2015 04:12 PM IST
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eight sports hostel will open in uttarakhand.

उत्तराखंड खेल विभाग से छह स्पोर्ट्स हॉस्टल तो संभाले नहीं जा रहे हैं, जबकि राज्य सरकार आठ स्पोर्ट्स हॉस्टल और खोलने जा रही है।

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इस सत्र तक इन स्पोर्ट्स हॉस्टल को खोल दिया जाएगा। पहले से चल रहे इन छह स्पोर्ट्स हॉस्टल में सभी संविदा प्रशिक्षकों के भरोसे हैं। इनमें से एक में भी स्थायी प्रशिक्षक नहीं है। इससे हॉस्टल में प्रशिक्षण ले रहे सैकड़ों खिलाड़ियों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।

2018 में उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेल होने हैं। खिलाड़ियों को बेहतर मंच इसके लिए राज्य सरकार ने जिलों में स्पोर्ट्स हॉस्टल खोलने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने अल्मोड़ा में बैडमिंटन हॉस्टल, बागेश्वर में ताइक्वांडो, चंपावत में बॉक्सिंग और उत्तरकाशी में फुटबॉल का बालिका हॉस्टल खोलने का निर्णय लिया है।
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ऊधमसिंह नगर में एथलेटिक्स, टिहरी में क्रिकेट, वॉलीबाल में चमोली और पिथौरागढ़ में बॉक्सिंग का ब्वॉयज हॉस्टल खोला जाएगा। संभवत: इस सत्र तक इन हॉस्टल को खोल भी दिया जाए।
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वहीं, पहले से चल रहे छह स्पोर्ट्स हॉस्टलों की स्थिति खराब है। सभी हॉस्टल संविदा प्रशिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। पिथौरागढ़ में एथलेटिक्स हॉस्टल में पिछले दो साल से स्थायी कोच नहीं है। यहां संविदा पर प्रशिक्षक रखे गए हैं।

हॉस्टल में कुल 20 सीटें हैं, जबकि 15 खिलाड़ी यहां एथलेटिक्स का प्रशिक्षण ले रहे हैं। देहरादून में फुटबॉल का हॉस्टल हैं। पिछले चार साल से हॉस्टल संविदा प्रशिक्षक के भरोसे चल रहा है। यहां 26 खिलाड़ी हैं। हल्द्वानी में भी फुटबॉल का हॉस्टल है। यहां भी काफी समय से स्थायी कोच नहीं है। संविदा प्रशिक्षक ही इन खिलाड़ियों का भविष्य संवार रहे हैं।

अगस्त्यमुनि (रुद्रप्रयाग) में बालिका वर्ग का एथलेटिक्स हॉस्टल चल रहा है। यहां 22 लड़कियां प्रशिक्षण ले रही हैं। यहां भी स्थायी कोच की व्यवस्था नहीं है। यहीं हाल कोटद्वार में चल रहे बाक्सिंग हॉस्टल और पौड़ी में चल रहे बैडमिंटन हॉस्टल का है।


नये ढांचे के तहत कैबिनेट में 47 कोच और छह वार्डन के पद स्वीकृत हो गए हैं। जबकि पहले से चल रहे छह हॉस्टल के लिए छह वार्डन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
- अजय अग्रवाल, उप निदेशक खेल

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