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मोदी सरकार के फैसले से आएंगे खिलाड़ियों के बुरे दिन
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 25 Aug 2014 03:11 PM IST
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केंद्र सरकार ने पंचायत युवा क्रीड़ा योजना (पायका) को खत्म कर दिया है। इससे उत्तराखंड के ग्रामीण अंचलों में हुनरमंद खिलाड़ियों को झटका लगेगा। पंचायत स्तर पर खेलों के आयोजन पर संकट बढ़ेगा तो गांवों में खेल मैदान भी नहीं बन पाएंगे।
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विभाग को करना पड़ सकता है लंबा इंतजार
हालांकि, केंद्र सरकार ने पायका के स्थान पर राजीव गांधी खेल योजना प्रारंभ करने की तैयारी की है, लेकिन इसे जमीन पर उतरने में वक्त लगेगा। ऐसे में ग्रामीण प्रतिभाओं को तराशने में विभाग को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
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पायका से ये थे लाभ
- ग्रामीण स्तर पर अंडर 16 बालक-बालिका और महिला ओपन प्रतियोगिताओं का आयोजन
- गांवों में खेल मैदान का निर्माण और अवस्थापना सुविधाओं का विकास
- गांव स्तर पर क्रीड़ा श्री के माध्यम से खिलाड़ियों की तैयारी
- खेल निदेशालय और फेडरेशन की रुकावट नहीं, बिना हस्तक्षेप नेशनल तक सफर
- राजीव गांधी खेल योजना में दिक्कत
- मिनी स्टेडियम ब्लाक स्तर पर ही बनाया जा सकेगा
- योजना के लिए बजट का अभी निर्धारण नहीं
- योजना के तहत खेलों का प्रारूप का अभी तय नहीं
- ग्रामीण खिलाड़ियों के लिए सुविधा की भी जानकारी नहीं
पर्वतीय राज्यों की अलग योजना पर भी संशय
केंद्र सरकार के स्तर पर पर्वतीय राज्यों के लिए अलग से खेल योजना बनाने की भी बात कही गई है। लेकिन अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट निर्देश या गाइडलाइन जारी नहीं की जा सकी है। ऐसे में यह संशय बन रहा है कि उत्तराखंड में राजीव गांधी खेल योजना लागू होगी या पर्वतीय राज्यों की योजना।
इस वर्ष पायका योजना खत्म हो गई है। राजीव गांधी खेल योजना से खेलों पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन गांवों में मैदान नहीं बनाए जा सकेंगे। राज्य से योजना के तहत प्रस्ताव भेजा गया है। राजीव गांधी खेल योजना और पर्वतीय राज्यों की योजना दोनों साथ चलेंगी या नहीं, अभी पता नहीं है। यह बात सही है कि स्थिति स्पष्ट होने तक ग्रामीण खेलों के लिए इंतजार करना होगा।
- अजय अग्रवाल, सहायक समादेष्टा, पायका
खिलाड़ियों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर प्रशिक्षण
एचएनबी विश्वविद्यालय ने खेलों की दुनिया में नया मुकाम हासिल करने के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। चौरास परिसर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं जुटाई गई हैं। सितंबर की शुरुआत में ही परिसर में कई साहसिक व अन्य खेलों का प्रशिक्षण शुरू होने की उम्मीद है।
विश्वविद्यालय के खिलाड़ी अब बेहतर तैयारियों के साथ प्रतियोगिताओं में भाग ले पाएंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय ने चौरास परिसर में अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं जुटा ली हैं। खेल निदेशक डॉ. सीपी सिंह ने बताया अब तक विश्वविद्यालय के पास ढांचागत सुविधाएं नहीं थी, लेकिन अब कई खेलों के लिए बेहतर उपकरण और अन्य सुविधाएं जुटाई जा चुकी हैं।
चौरास परिसर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का जिम, बहुउद्देश्यीय हॉल, बॉक्सिंग रिंग, कुश्ती, पोर्टेबल शूटिंग रेंज, जूडो व टेबल टेनिस हॉल तैयार किए जा चुके हैं। इसके बाद खिलाड़ियों के लिए दो सौ बेड का हॉस्टल, स्क्वॉश कोर्ट आदि का निर्माण जल्द शुरू किया जाएगा।
इस वर्ष पायका योजना खत्म हो गई है। राजीव गांधी खेल योजना से खेलों पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन गांवों में मैदान नहीं बनाए जा सकेंगे। राज्य से योजना के तहत प्रस्ताव भेजा गया है। राजीव गांधी खेल योजना और पर्वतीय राज्यों की योजना दोनों साथ चलेंगी या नहीं, अभी पता नहीं है। यह बात सही है कि स्थिति स्पष्ट होने तक ग्रामीण खेलों के लिए इंतजार करना होगा।
- अजय अग्रवाल, सहायक समादेष्टा, पायका
खिलाड़ियों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर प्रशिक्षण
एचएनबी विश्वविद्यालय ने खेलों की दुनिया में नया मुकाम हासिल करने के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। चौरास परिसर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं जुटाई गई हैं। सितंबर की शुरुआत में ही परिसर में कई साहसिक व अन्य खेलों का प्रशिक्षण शुरू होने की उम्मीद है।
विश्वविद्यालय के खिलाड़ी अब बेहतर तैयारियों के साथ प्रतियोगिताओं में भाग ले पाएंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय ने चौरास परिसर में अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं जुटा ली हैं। खेल निदेशक डॉ. सीपी सिंह ने बताया अब तक विश्वविद्यालय के पास ढांचागत सुविधाएं नहीं थी, लेकिन अब कई खेलों के लिए बेहतर उपकरण और अन्य सुविधाएं जुटाई जा चुकी हैं।
चौरास परिसर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का जिम, बहुउद्देश्यीय हॉल, बॉक्सिंग रिंग, कुश्ती, पोर्टेबल शूटिंग रेंज, जूडो व टेबल टेनिस हॉल तैयार किए जा चुके हैं। इसके बाद खिलाड़ियों के लिए दो सौ बेड का हॉस्टल, स्क्वॉश कोर्ट आदि का निर्माण जल्द शुरू किया जाएगा।