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गोल्फ कोर्स पर उतरी देश की पहली महिला कैडी
संजीव पंगोत्रा,अमर उजाला चंडीगढ़
Updated Sun, 12 Jan 2014 10:34 AM IST
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देश में पहली बार सिटी ब्यूटीफुल के गोल्फ कोर्स पर महिला कैडी उतरी है। अभी तक विदेशों में ही लड़कियां महिला कैडी का काम करती हैं।
चंडीगढ़ गोल्फ क्लब देश का पहला ऐसा क्लब बना है जहां पर लड़की कैडी अपनी पहली आजीविका कमाने में कामयाब हुई। यहां कैडी बनी लड़कियां किसी संपन्न परिवारों की न होकर आर्थिक रूप से कमजोर घरों से ताल्लुक रखती हैं।
हम बात कर रहे हैं सेक्टर 14 के साथ बनी जनता कालोनी की रहने वाली 14 वर्षीय रीतू चौधरी जोकि एक एजनजीओ के सहयोग से आठवीं कक्षा में पढ़ती हैं। पिता प्राईवेट दफ्तर में सफाई का काम करते हैं। चार भाई बहनों में रीतू सबसे बड़ी हैं।
ऐसी बनी महिला कैडी
चंडीगढ़ गोल्फ एसोसिएशन (सीजीए) की ओर से ये मौका मिला है। डीआईआर नाम एनजीओ के बहनों को सीजीए में जूनियर कैडी प्रोग्राम के तहत दिसंबर 2013 में चंडीगढ़ गोल्फ रेंज (सीजीए) की ट्रेनिंग दी गई।
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प्रोग्राम के तहत जनता कॉलोनी और आदर्श कॉलोनी के गरीब परिवार के बहनों को सीजीए में 12 दिनों की कैडी की ट्रेनिंग दी गई। इसमें कुल 15 बच्चे रहे। इनमें 12 लड़के और 4 लड़कियां रहीं।
इन बच्चों को सी कैटागिरी के तहत सीजीए के प्रोफेशनल कोच महेश कुमार ने कड़ी ट्रेनिंग दी। इसमें गोल्फ की बेसिक ट्रेनिंग दी गई कि कैसे गोल्फ को दूसरों को खिलाना हैं।
कोच महेश ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान पहले तो इन्हें गोल्फ के खेल की तमाम जानकारियां दी गईं। इन्हें बताया गया कि गोल्फ खेलने आए लोगों से कैसे बातचीत करनी है। इसके बाद इनका बकायदा टेस्ट लिया गया, जिसमें वह पास हुई।
गोल्फ क्लब में हाथ में आई पहली कमाई
रीतू चौहान इतनी कम उम्र में परिवार का अर्थिक बोझ उठाने निकली है। इस लड़की ने जब गोल्फ क्लब में अपनी पहले दिन की कमाई 150 रुपये को अपने हाथों में लिया तो उसकी आंखों में खुशी के मारे आंसू निकल आए।
इसने बताया कि क्लब में काफी संख्या में लड़के कैडी काम करते हैं। पहले दिन तो झिझक हुई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
रीतू ने कहा कि पहले दिन 5 घंटे में 18 होल खिलाए और 150 रुपये कमाए। इस कमाई से परिवार का बोझ कम करने की कोशिश रहेगी। रीतू सुबह एनजीओ की मदद से सुबह स्कूल में पढ़ती है वही शाम को वह गोल्फ क्लब में अपनी आजीविका भी कमा रही है।
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चंडीगढ़ गोल्फ क्लब देश का पहला ऐसा क्लब बना है जहां पर लड़की कैडी अपनी पहली आजीविका कमाने में कामयाब हुई। यहां कैडी बनी लड़कियां किसी संपन्न परिवारों की न होकर आर्थिक रूप से कमजोर घरों से ताल्लुक रखती हैं।
हम बात कर रहे हैं सेक्टर 14 के साथ बनी जनता कालोनी की रहने वाली 14 वर्षीय रीतू चौधरी जोकि एक एजनजीओ के सहयोग से आठवीं कक्षा में पढ़ती हैं। पिता प्राईवेट दफ्तर में सफाई का काम करते हैं। चार भाई बहनों में रीतू सबसे बड़ी हैं।
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ऐसी बनी महिला कैडी
चंडीगढ़ गोल्फ एसोसिएशन (सीजीए) की ओर से ये मौका मिला है। डीआईआर नाम एनजीओ के बहनों को सीजीए में जूनियर कैडी प्रोग्राम के तहत दिसंबर 2013 में चंडीगढ़ गोल्फ रेंज (सीजीए) की ट्रेनिंग दी गई।
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प्रोग्राम के तहत जनता कॉलोनी और आदर्श कॉलोनी के गरीब परिवार के बहनों को सीजीए में 12 दिनों की कैडी की ट्रेनिंग दी गई। इसमें कुल 15 बच्चे रहे। इनमें 12 लड़के और 4 लड़कियां रहीं।
इन बच्चों को सी कैटागिरी के तहत सीजीए के प्रोफेशनल कोच महेश कुमार ने कड़ी ट्रेनिंग दी। इसमें गोल्फ की बेसिक ट्रेनिंग दी गई कि कैसे गोल्फ को दूसरों को खिलाना हैं।
कोच महेश ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान पहले तो इन्हें गोल्फ के खेल की तमाम जानकारियां दी गईं। इन्हें बताया गया कि गोल्फ खेलने आए लोगों से कैसे बातचीत करनी है। इसके बाद इनका बकायदा टेस्ट लिया गया, जिसमें वह पास हुई।
गोल्फ क्लब में हाथ में आई पहली कमाई
रीतू चौहान इतनी कम उम्र में परिवार का अर्थिक बोझ उठाने निकली है। इस लड़की ने जब गोल्फ क्लब में अपनी पहले दिन की कमाई 150 रुपये को अपने हाथों में लिया तो उसकी आंखों में खुशी के मारे आंसू निकल आए।
इसने बताया कि क्लब में काफी संख्या में लड़के कैडी काम करते हैं। पहले दिन तो झिझक हुई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
रीतू ने कहा कि पहले दिन 5 घंटे में 18 होल खिलाए और 150 रुपये कमाए। इस कमाई से परिवार का बोझ कम करने की कोशिश रहेगी। रीतू सुबह एनजीओ की मदद से सुबह स्कूल में पढ़ती है वही शाम को वह गोल्फ क्लब में अपनी आजीविका भी कमा रही है।