{"_id":"f69cd386aca8e252fa3bfcc1e4a172bb","slug":"carelessness-about-football","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड में राज्य खेल के लिए ही नहीं है कोच","category":{"title":"Sports Archives","title_hn":"खेल आर्काइव","slug":"sports-archives"}}
उत्तराखंड में राज्य खेल के लिए ही नहीं है कोच
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 21 Jun 2014 03:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड के राज्य खेल फुटबॉल को बढ़ावा देने की कवायद की सच्चाई देखिए। दून में खुले फुटबॉल हॉस्टल को 14 साल में एक स्थायी कोच तक नहीं मिल सका है।
विज्ञापन
बीते 4-5 वर्षों में और खराब हुए हालात
सिर्फ अफसरों के बूते घिसट रहे इस हॉस्टल के हालात बीते 4-5 वर्षों में और खराब हुए हैं। खेल सिखाने वालों पर प्रशासन की दोहरी जिम्मेदारी डाल दी गई। इससे वे न खिलाड़ियों को वक्त दे पाए, न खेल को।
विज्ञापन
मौजूदा कोच और उप जिला क्रीड़ा अधिकारी राजेश ममगाई प्रमोशन पाकर बतौर जिला क्रीड़ा अधिकारी चमोली जा चुके हैं। तब से कोच और वार्डन दोनों पद खाली हैं।
अमर बहादुर गुरुंग, श्याम थापा जैसे दिग्गज फुटबॉलर देने वाले दून में प्रतिभाओं को तराशने के लिए उत्तर प्रदेश के समय फुटबॉल हॉस्टल स्थापित किया गया था।
राज्य गठन के बाद खेल विभाग बना और हॉस्टल जिला खेल कार्यालय के अंडर आ गया। साई सेंटर में आए साई कोच डा. एससी नेगी को हॉस्टल की भी जिम्मेदारी दे दी गई।
नेगी महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के प्राचार्य बने तो वर्ष 2010 में फुटबाल कोच राजेश ममगाई को हॉस्टल की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह कोच भी थे और हॉस्टल के वार्डन भी।
विज्ञापन
फुटबॉल हॉस्टल में कोच पद खाली
इनके पास उप जिला क्रीड़ा अधिकारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी थी। चार साल तक ममगाई देहरादून रहे। इस बीच उन्हें जिला खेल अधिकारी का प्रभार भी दे दिया गया।
मई अंत में राजेश ममगाई प्रमोट होकर बतौर जिला खेल अधिकारी चमोली चले गए। तब से फुटबॉल हॉस्टल में कोच पद खाली है। अब इस पर संविदा कोच लाने की तैयारी है।
विशेषज्ञों की मानें तो हॉस्टल के लिए अलग कोच की व्यवस्था होनी चाहिए। सरकारी कामों के साथ कोचिंग संभव नहीं। फिर भी फुटबॉल हॉस्टल को स्थायी कोच नहीं मिल सका है।
फुटबॉल हॉस्टल में कोच पद खाली है। खिलाड़ियों के हित के लिए इसे जल्द भरने की कोशिश है। फिलहाल अस्थायी तौर पर संविदा कोच नियुक्त किया जा सकता है। शासन में कोच और अन्य पदों का प्रस्ताव भेजा गया है।
- अजय अग्रवाल, उप निदेशक खेल