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14 साल के पवन ने संभाली अतंरराष्ट्रीय बॉक्सर की विरासत

Sun, 05 Oct 2014 01:11 PM IST
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 05 Oct 2014 01:11 PM IST
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boxer pawan thapa dehradun.

इंडिया कैंप में अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर शिव थापा से खास गुर सीखने और राष्ट्रीय कोचों के बीच खास पहचान पाकर दून का 14 वर्षीय बॉक्सर पवन गुरुंग घर लौट आया है।

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'अब ओलंपिक के लिए खेलो'
उसके कानों में अब भी शिव थापा के शब्द गूंज रहे हैं, ‘नेशनल कैंप तक आ गए हो तो अब ओलंपिक के लिए खेलो। बाउट से पहले डरो मत और न विपक्षी को डर दिखाओ, तभी तुम्हारी जीत होगी।’
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पवन के लिए शिव का यह गुरुमंत्र तो खास है ही, उससे कहीं अधिक यह खुशी भी है कि बॉक्सिंग में वह भी परिवार की चौथी पीढ़ी का खिलाड़ी बन गया है। पवन के परदादा जंग बहादुर गुरुंग भी अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर थे।
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मोहिनी रोड निवासी पवन ने चार साल पहले सेना के लिए खेलने वाले बड़े भाई प्रवीण गुरुंग को देखकर शौकिया बॉक्सिंग ग्लब्ज पहने थे, लेकिन अब उनके पंच के दम ने उन्हें देश के उभरते बॉक्सरों में शुमार कर दिया है।


मुंबई में 38 दिन के इंडिया कैंप से लौटे पवन शनिवार को परेड ग्राउंड पहुंचे। पवन ने बताया कि वर्ष 2010 में वह बॉक्सिंग से जुड़ने के लिए परेड ग्राउंड पहुंचे और यहां अर्जुन अवार्डी बॉक्सर पदम बहादुर मल्ल ने उन्हें खेल की बारीकियां सिखाईं। वर्ष 2011 से वह स्पोर्ट्स कॉलेज में हैं।

आठवीं के छात्र पवन कॉलेज में कोच ललित मोहन और सुरेश शर्मा से बॉक्सिंग सीख रहे हैं। पवन ने बताया कि अब वह नेशनल चैंपियनशिप की तैयारी में जुटे हैं।

मेडल लिस्ट
- वर्ष 2010 की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अंडर-30 किलो वर्ग में स्वर्ण
- वर्ष 2011 में सब जूनियर नेशनल 40 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक
- वर्ष 2012 में स्कूल नेशनल गेम्स 40 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक
- वर्ष 2012 में ही फेडरेशन नेशनल टूर्नामेंट 40 किग्रा वर्ग में सोना
- वर्ष 2013 शिक्षा विभाग की राज्य स्तरीय बाक्सिंग अंडर-19 में स्वर्ण पदक

फैमिली प्रोफाइल
जंग बहादुर गुरुंग (परदादा): नेपाल के लिए एशियन गेम्स में प्रतिभाग
धन बहादुर गुरुंग (दादा): भारतीय सेना और सर्विसेज के लिए खेले
नरेश गुरुंग (पिता): भारतीय सेना के बॉक्सर रहे
प्रवीण गुरुंग (भाई): उत्तराखंड राज्य और अब सेना के लिए कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में प्रतिभाग

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