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चुनौतियों से पार पा उत्तराखंड की बेटी ने विदेश में रचा इतिहास

Sun, 05 Jul 2015 05:28 PM IST
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 05 Jul 2015 05:28 PM IST
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boxer kamla bisht won gold in world police championship.

उत्तराखंड की कमला की जिद ही थी, जिसने उन्हें अमेरिका में इतिहास रचने का मौका दिया। वर्ल्ड पुलिस एवं फायर गेम्स में मुक्केबाजी का स्वर्ण पदक जीतकर कमला ने उत्तराखंड पुलिस और उत्तराखंड की पहली महिला मुक्केबाज बनने का गौरव हासिल किया है। चैंपियन बनकर कमला भी खुश हैं और उनके कोच एवं दोस्त भी।

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करीब तीन माह पहले वर्ल्ड पुलिस एवं फायर गेम्स के लिए भारतीय पुलिस टीम की सूची बनने लगी थी। तब बढ़ती उम्र के कारण कमला बिष्ट (33 साल) को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया गया था और ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में उनसे हारी खिलाड़ी को चुना गया। यह बात खुलते ही कमला ने विरोध किया।
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यही नहीं कमला को प्रैक्टिस छोड़कर देहरादून आकर उच्च अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखनी पड़ी। पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद आखिर में तमाम विरोध के बाद चयनकर्ताओं को सूची बदलनी पड़ी और कमला को वर्ल्ड पुलिस एवं फायर गेम्स का टिकट मिला।

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उम्र को दी मात, बनीं प्रेरणा

boxer kamla bisht won gold in world police championship.

कमला के कोच किशन सिंह महर के अनुसार शुरू से ही कमला में खेल के प्रति जुनून था। वर्ष 2003 में पहली बार कमला ने गलब्ज पहने और कुछ समय बाद ही नेशनल चैंपियनशिप में पहला स्वर्ण जीता।

इसके बाद फेडरेशन कप, ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में भी नाम कमाया। हालांकि, कमला को अपनी उम्र और स्पीड के हिसाब से स्पाइरिंग (ट्रेनिंग फाइट) महिला पार्टनर नहीं मिल सके। इस वजह से कमला की लड़कों से फाइट करानी शुरू की।

शुरू में कमला झिझकी, लेकिन जब मोटिवेट किया तो दम लगाकर खेली और लड़कों को मात दी। अपने खेल के लिए वह बारिश के मौसम में भी पिथौरागढ़ से करीब 8 किलोमीटर दूर कुसौली गांव से दौड़कर मैदान पहुंचतीं।

देश में तीन बच्चों की मां मैरी कॉम को युवा मुक्केबाजों के लिए प्रेरणास्रोत माना जाता है। लेकिन उत्तराखंड में कमला बिष्ट युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं। करीब 33 साल की कमला बिष्ट ने बढ़ती उम्र को मात देकर वर्ल्ड पुलिस एवं फायर गेम्स में स्वर्ण जीता है।

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