अब बीसीसीआई से खेल पाएंगे उत्तराखंड के खिलाड़ी
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अब उत्तराखंड के क्रिकेट खिलाड़ी भी बीसीसीआई से खेल सकेंगे। राज्य की क्रिकेट प्रतिभाओं को यूपी अथवा दूसरे राज्यों का मुंह नहीं देखना पड़ेगा। बीसीसीआई ने उत्तराखंड में क्रिकेट के संचालन के लिए तदर्थ कमेटी का गठन किया है।
कमेटी उत्तराखंड में जूनियर स्तर पर क्रिकेट का स्तर सुधारने के साथ ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं में भी उत्तराखंड के खिलाड़ियों का प्रतिभाग करवाएगी। सूत्रों की मानें तो तदर्थ कमेटी के बनने से राज्य की टीम बनाने की राह खुल जाएगी।
उत्तराखंड को अलग राज्य बने 15 साल होने को हैं, लेकिन अभी तक राज्य में क्रिकेट एसोसिएशन का गठन नहीं हो सका है, जिसे बीसीसीआई से मान्यता मिली हो। जिसका खामियाजा यहां की खेल प्रतिभाओं को भुगतना पड़ रहा है।
बीसीसीआई के नए सचिव अनुराग ठाकुर ने उत्तराखंड के खिलाड़ियों के दर्द को दूर करने की पहल की है। उत्तराखंड में मान्यता के मुद्दे को दूर कर एसोसिएशन के गठन के लिए पांच सदस्यों की कमेटी बनाई है।
बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर ने जारी की विज्ञप्ति
बीसीसीआई की ओर से जारी विज्ञप्ति में अनुराग ठाकुर का कहना है कि उत्तराखंड में कई क्रिकेट एसोसिएशन हैं, इस कारण युवा क्रिकेट खिलाड़ियों के आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिल पा रहा है। बीसीसीआई ने युवा प्रतिभाओं को उभारने और तराशने के मकसद से एड-हॉक कमेटी का गठन किया है।
कमेटी उत्तराखंड के मान्यता के रास्ते में आ रही रुकावटों को दूर करेगी। राज्य में कई एसोसिएशन के बीच चल रही लड़ाई को दूर कर सभी को साथ लाने की कोशिश भी होगी।
जानकारी के अनुसार यह कमेटी राज्य में जूनियर स्तर अंडर-14, अंडर-16, अंडर-19 आयु वर्ग के क्रिकेटरों की संभावनाओं को तलाशेगी। इसके बाद राज्य में खिलाड़ियों को एकजुट कर एक टीम बनाने की कोशिश होगी, जिसे बीसीसीआई से मान्यता प्राप्त और बीसीसआई के टूर्नामेंट में इसी साल से खेलने का मौका मिलेगा।
उत्तराखंड की ये तदर्थ कमेटी
एमपी पंडोव-चेयरमैन
विशाल मारवाह-सचिव हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन
सुबीर गांगुली- संयुक्त सचिव क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल
विनोद शाह- उपाध्यक्ष- महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन
केवीपी राव- मैनेजर गेम डेवलपमेंट, बीसीसीआई कॉर्डिनेटर
अब यूपी की ओर नहीं देखना पड़ेगा
प्रदेश की किसी क्रिकेट एसोसिएशन के बीसीसीआई से मान्यता नहीं मिलने के कारण उत्तराखंड के खिलाड़ियों को यूपी से खेलना पड़ता था। उत्तर प्रदेश ने उत्तराखंड को अपना 12वां जोन घोषित किया था। अब तदर्थ कमेटी बनने के बाद उत्तराखंड के खिलाड़ियों को यूपी की ओर नहीं देखना पड़ेगा। सीधे बीसीसीआई का राज्य की क्रिकेट पर नियंत्रण रहेगा।
एसोसिएशनों की जिद में पिसे क्रिकेटर
राज्य गठन के बाद से क्रिकेट एसोसिएशन में बीसीसीआई से मान्यता के लिए प्रयास शुरू हो गए थे। बीसीसीआई के सामने राज्य की छह क्रिकेट एसोसिएशनों ने प्रजेंटेशन दिया था। लेकिन बीसीसीआई ने चार क्रिकेट एसोसिएशनों को नकार दिया।
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड और उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन को एक होने के लिए कहा गया। इसके बावजूद सिर्फ पदों और अहम की लड़ाई के कारण दोनों एसोसिएशन एक नहीं हो सकीं। बीते 15 साल से चल रही लड़ाई के कारण एसोसिएशनों का कुछ नहीं बिगड़ा, लेकिन राज्य के क्रिकेटरों के लिए रास्ते बंद रहे। दूसरे राज्यों में ट्रायल देने में खिलाड़ियों को सोचना पड़ता है। भाजपा शासनकाल में खेल मंत्री खजान दास ने सभी एसोसिएशनों को एक करने की कोशिश की, लेकिन जिद के कारण दो एसोसिएशन साथ नहीं आईं।
दूसरे राज्यों से खेलते हैं उत्तराखंड के खिलाड़ी
उन्मुक्त चंद, पवन नेगी, पवन सुयाल-दिल्ली, मनीष पांडे- कर्नाटक, रॉबिन बिष्ट, चेतन बिष्ट- राजस्थान, एकता बिष्ट, स्नेह राणा- रेलवे, ई. अभिमन्यु- पश्चिम बंगाल, सिद्धार्थ- हिमाचल प्रदेश, तनुष- गुजरात, श्वेता वर्मा- उत्तर प्रदेश।