शिवरात्रि यूं ही नहीं कहलाती है मोक्ष की रात्रि
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फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी शिव आराधना का दिन है, जिसे महाशिवरात्रि के नाम से जानते हैं। यह पर्व मनुष्यों को पाप, अन्याय और अनाचार से दूर रहकर शुद्ध, पवित्र और सात्विक जीवन जीने की प्रेरणा देता है। कहते हैं कि कल्याण और मोक्ष प्रदान करने वाली महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का विधि-विधान के साथ पूजा करने से सुख-शांति और खुशहाली आती है।
शिव क्यों हैं पूज्य
महादेवजी की साकार और निराकार, दोनों ही रूपों में पूजा की जाती है। शिव के पूजन में शिवलिंग के पूजन का विशेष महत्व माना गया है। जिसका अर्थ है कि प्रकृति समस्त योनियों का समष्टि रूप है।
मानवता का कल्याण करने की कामना रखने वाले भगवान शंकर ने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष का सेवन करके संपूर्ण चराचर जगत को यह संदेश दिया कि वे काल के देवता भी हैं।
शिवरात्रि क्यों है खास?
अन्याय और अत्याचार का पर्याय बने तारकासुर के वध का निमित्त बने भगवान शिव ने माता सती के अपने पिता के घर यज्ञाग्नि में भस्म होने के बाद तांडव नृत्य करके समस्त लोकों में अपनी संहार शक्ति का परिचय भी दिया। देवी सती ने जब पार्वती के रूप में जन्म लिया तब महाशिवरात्रि के दिन ही शिव के संग उनका विवाह हुआ था। इसलिए शिवरात्रि का शिव और उनके भक्तों के लिए बहुत ही खास है।
महाशिवरात्रि काल की अभिव्यक्ति देने वाली एकमात्र ऐसी कालरात्रि है, जो मनुष्यों को पापकर्म, अन्याय और अनाचार से दूर रहकर पवित्र एवं सात्विक जीवन जीने की प्रेरणा देती है। इसलिए महाशिवरात्रि को कल्याण और मोक्ष प्रदान करने वाली माना गया है। श्रद्धाभाव से हो शिव पूजन भगवान शिव का पूजन श्रद्धाभाव के साथ करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
प्रसन्न होंगे शिव, ऐसे करें शिव की पूजा
पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके 'ॐ नमः शिवाय' का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर गंगाजल, गौदुग्ध, दही, घृत, शहद, पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए।
चंदन, बूरा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, पंचमेवा, फल, धतूरा, रुद्राक्ष, बेलपत्र, पुष्पों में कनेर, नीलकमल, गुलाब, चमेली, गेंदा आदि अर्पित करने के साथ-साथ धूप और दीप प्रज्ज्वलित करना चाहिए।
ध्यान रहे, शिवलिंग पर कभी भी चंपा, केतकी, नागकेशर, केवड़ा और मालती के पुष्प नहीं चढ़ाने चाहिए।
शिवरात्रि की रात करें यह काम
महाशिवरात्रि की रात्रि में जागरण करते हुए शिव जी की आराधना करने और शांत-चित्त एवं पूर्ण सात्विक भाव से व्रत रखने से भक्तों के समस्त दुःख तथा कष्ट दूर हो जाते हैं।
शिव पूजन के दौरान महामृत्युंजय मंत्र, शिवाष्टक, रुद्राष्टक, रामचरितमानस के बालकांड के अंतर्गत शिव-सती प्रसंग का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है। व्रत न भी कर सके, तो उक्त पाठ से भी शिव उपासना का संपूर्ण फल मिल जाता है।