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अनसुनी आवाजों को शब्द

Thu, 08 Oct 2015 08:34 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Thu, 08 Oct 2015 08:34 PM IST
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 words of Unheard voices

बेलारूस की लेखिका स्वेतलाना एलेक्सिएविच को साहित्य का नोबल पुरस्कार देने की घोषणा उन लाखों अनसुनी आवाजों का ही सम्मान है, जिन्हें उन्होंने अपनी रचनाओं के जरिये शब्द दिए हैं। स्वेतलाना की पृष्ठभूमि को देखते हुए सहसा यह लग सकता है कि उन्हें इस पुरस्कार के लिए पुतिन की अगुआई में रूस के अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी ताकतों से बढ़ते टकराव की वजह से तो नहीं चुना गया!

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मगर ऐसा सोचना उनके रचनात्मक अवदान को कम करना होगा। सही मायने में तो उनकी रचनाएं साहित्य के उस खांचे में ही फिट नहीं बैठतीं, जिसमें उपन्यास, कहानियां या कविताओं जैसी विधाओं को रखा जाता है। वास्तव में स्वेतलाना ने जो कुछ लिखा है या लिख रही हैं, वह डॉक्यूमेंटरी और उपन्यास के बीच की चीज है, जिसके लिए वह सीधे लोगों से रू-ब-रू होती हैं। इसे 'कलेक्टिव नॉवेल' या 'नॉवेल एविडेंस' कहा जा रहा है।
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रूसी भाषा में लेखन करने वाली स्वेतलाना की रचनाएं भले ही सोवियत संघ और उसके पतन के बाद की परिस्थितियों से जुड़ी रही हैं, मगर उन्हें किसी भौगोलिक सरहद में बांधना उनके साथ अन्याय करना होगा। असल में वह गहरी संवेदना से जुड़ी रचनाकार हैं, जिसने दूसरे विश्वयुद्ध, सोवियत-अफगान युद्ध और चेरनोबिल जैसी परमाणु त्रासदी के पीड़ितों के दर्द को शब्द दिए। उनकी रचनाएं यातनाओं, उत्पीड़न और गहरी उदासी में डूबे लोगों की पीड़ाओं का दस्तावेजीकरण है।
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एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि दूसरे विश्वयुद्ध में सोवियत संघ की दस लाख महिलाओं ने हिस्सा लिया था। इनमें से न जाने कितनी विधवा हो गईं, कितनों के परिवार लुट गए, कितनी बेसहारा हो गईं। ऐसी सैकड़ों महिलाओं के साक्षात्कार के आधार पर उन्होंने वार्स अनवूमनली फेस (युद्ध का स्त्री विरोधी चेहरा) किताब लिखी, जिसकी बीस लाख प्रतियां बिक गई थीं!


उनकी अन्य कृतियों में वायसेज फ्रॉम चेरनोबिल ः द ओरल हिस्ट्री ऑफ न्यूक्लियर डिजाइन और जिंकी ब्वॉयज ः सोवियत वायसेज फ्रॉम ए फॉरगेटन वार शामिल हैं। ऐसे समय जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में घोषित-अघोषित युद्ध के हालात हैं; जिनमें जाने-अनजाने महिलाएं और बच्चे ही निशाने पर हैं, स्वेतलाना की ये किताबें कुछ राह दिखा सकती हैं।

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