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सेंटर कोर्ट का नया बादशाह
नई दिल्ली
Updated Mon, 08 Jul 2013 09:07 PM IST
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विंबलडन को सिर्फ ग्लैमर और चकाचौंध ही नहीं, अप्रत्याशित घटनाओं के लिए भी जाना जाता है। इससे बड़ा उलट-फेर और क्या हो सकता था कि एंडी मरे ने वह कारनामा कर दिखाया, जिसके लिए ब्रिटेन के लोग 77 बरस से इंतजार कर रहे थे। इस जीत का ब्रिटेनवासियों के लिए क्या महत्व है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विजयी होने के बाद मरे के प्रशंसक उन्हें ट्वीटर पर 'सर एंडी मरे' संबोधन से नवाजने लगे।
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तीन घंटे से भी लंबे समय तक चले कड़े मुकाबले में दुनिया के नंबर वन खिलाड़ी नोवाक जोकोविच को पराजित कर मरे ने सही मायने में नया इतिहास ही रच दिया है। यह जीत इसलिए भी अहम है, क्योंकि जोकोविच ने रिकॉर्ड चार घंटे तिरालिस मिनट लंबे चले सेमीफाइनल मुकाबले में डेल पोत्रो को पराजित कर मरे के सामने मजबूत चुनौती पेश की थी। मरे की राह आसान नहीं थी, जैसा कि दुनियाभर के खेल प्रेमियों ने देखा कि कैसे उन्हें पहला सेट जीतने में ही 59 मिनट लग गए थे।
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मगर यह खेल दमखम से खेला जाता है और शायद जोकोविच सारी ऊर्जा सेमीफाइनल में ही गंवा चुके थे। वैसे विंबलडन के इस बार के मुकाबलों में शुरुआत से ही जितने उलटफेर देखने को मिले, वैसा शायद पहले कम ही देखा गया है। पिछली बार फाइनल में मरे जिन दिग्गज रोजर फेडरर के हाथों पराजित हुए थे, वह तो शुरुआती मुकाबलों में ही बाहर हो गए थे! शुरुआत में जब अनेक पुरुष और महिला दिग्गज खिलाड़ी जल्दी-जल्दी बाहर होने लगे, तो इसका दोष ग्रास कोर्ट पर भी मढ़ा गया था, मगर इससे इन मुकाबलों का महत्व कम नहीं हो जाता।
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वास्तव में टेनिस का मक्का कहे जाने वाले विंबलडन में जीतना हर टेनिस खिलाड़ी का सपना होता है। मसलन, इस बार की महिला चैंपियनशिप जीतने वाली फ्रांस की मरियम बार्तोली को ही लीजिए, जिन्हें यह खिताब जीतने में 11 बरस लग गए। विंबलडन में भारत की चुनौती अमूमन मिक्स और डबल्स मुकाबलों तक ही सीमित होती है, लेकिन इस बार यह सफर जल्दी ही खत्म हो गया। बहरहाल, टेनिस में अब यदि नडाल-फेडरर के युग की समाप्ति और मरे-जोकोविच युग की शुरुआत कहा जा रहा है, तो गलत नहीं है। आगे इन्हीं दोनों के बीच और दिलचस्प मुकाबले देखने को मिलेंगे।