फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   will Pakistan take the lessons

क्या सबक लेगा पाकिस्तान

Tue, 16 Dec 2014 08:54 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Tue, 16 Dec 2014 08:54 PM IST
विज्ञापन
will Pakistan take the lessons

पाकिस्तान के पेशावर में एक आर्मी पब्लिक स्कूल पर तालिबान के बर्बर हमले ने हमारी सामूहिक चेतना को झकझोर कर रख दिया है। यह आतंक का सबसे खौफनाक चेहरा है, जिसने मासूम बच्चों को भी नहीं बख्शा। तालिबान के हथियारबंद आतंकी एक स्कूल में घुसकर कई घंटे तक वहशियाना तरीके से बच्चों और स्कूल के कर्मचारियों को निशाना बनाते रहे, जिसमें 120 से अधिक बच्चों की मौत हो गई।

विज्ञापन


तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे पाकिस्तानी फौज की उसके खिलाफ खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में की जा रही कार्रवाई का बदला बताया है! पर यह सिर्फ एक आड़ है। पाकिस्तानी फौज ने यह कार्रवाई इस वर्ष जून में शुरू की थी, लेकिन 2007 में अपने गठन के समय से पाकिस्तान तालिबान अल कायदा और अफगानिस्तानी तालिबान के रास्ते पर चलता आया है और उसने पाकिस्तान के कई शहरों में आतंकी हमले किए हैं।
विज्ञापन


इसी तालिबान ने दो वर्ष पूर्व मलाला यूसुफजई को भी सिर्फ इसलिए निशाना बनाया था, क्योंकि वह बच्चों के अधिकार और उनकी पढ़ाई की बात कर रही थी। हालत यह है कि बच्चों के अधिकार के लिए लड़ने वाले भारतीय कैलाश सत्यार्थी के साथ शांति का नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद भी मलाला अपने देश नहीं लौट सकी है! इन आतंकियों के लिए बच्चों और महिलाओं में कोई फर्क नहीं है। फिर वह आईएस हो, बोको हरम हो, अल कायदा हो या फिर तालिबान। यह घटना पाकिस्तान के पूरे तंत्र की नाकामी को भी उजागर करती है, जिसने तालिबान को फलने-फूलने का पूरा मौका दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस हमले को राष्ट्रीय आपदा बताया है, लेकिन इसके साथ ही हमारे इस पड़ोसी देश को आतंकवाद के मुद्दे पर आत्ममंथन भी करना चाहिए। वह खुद भी आतंकवाद से जूझ रहा है, लेकिन भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वालों को संरक्षण भी देता आया है। वास्तव में पेशावर में हुए हमले से दो दिन पहले सिडनी में एक सिरफिरे द्वारा एक कैफे में कुछ लोगों को बंधक बनाने की घटना बताती है कि कैसे आतंकवाद एक वैश्विक खतरा बन गया है, कि कैसे एक अकेला आतंकी भी करोड़ों लोगों की जान सांसत में डाल सकता है। पेशावर की घटना सिर्फ पाकिस्तान के लिए ही नहीं, उन सभी देशों के लिए सबक होनी चाहिए जो जाने-अनजाने आतंकियों को पनाह देते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed