फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   who sleep on notes

नोटों के बिस्तर पर सोने वाले

Sun, 20 Oct 2013 06:59 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Sun, 20 Oct 2013 06:59 PM IST
विज्ञापन
who sleep on notes

कहते हैं, सपने सच नहीं होते। लेकिन सपने को सच करने के झमेले भी कम नहीं हैं। अभी तो एक साधु का सपना साकार करने के लिए उन्नाव में चल रही खुदाई पर केंद्र की यूपीए सरकार ही निशाने पर थी। लेकिन अब त्रिपुरा में एक नेता ने अपना सपना पूरा करने के लिए जो किया, उससे खुद को पाक-साफ बताने वाली माकपा तक शर्मसार है।

विज्ञापन


समर आचार्य नाम के इस नेता ने अपने बैंक खाते से बीस लाख रुपये निकाले और नोटों के बिस्तर पर सोने का वर्षों पुराना सपना पूरा कर लिया। जिस देश में राजनेता करोड़ों का घोटाला करते हैं, वहां माकपा नेता का यह 'जुर्म' मामूली ही कहा जाएगा।
विज्ञापन


लेकिन इस पूरी घटना का मोबाइल से वीडियो बना लेना और अपने पार्टी नेताओं को पाखंडी कहना बताता है कि मामला उतना व्यक्तिगत है नहीं। इस बहाने त्रिपुरा में वाम शासन के भ्रष्टाचार की, भले ही वह कितना ही छोटा-मोटा क्यों न हो, कलई खुल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


समर आचार्य खुद को उसूलों का पक्का बता रहे हैं, पर आंकड़े बताते हैं कि अगरतला नगर निगम में सस्ते शौचालय निर्माण के ठेके में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उन्होंने करीब ढाई करोड़ की रकम बना ली है। उनकी यह कारगुजारी उन्हें दूसरी राजनीतिक पार्टियों के उन नेताओं के बराबर खड़ा करती है, जो पशुचारे से, तोप सौदे से, ताबूत की खरीद से, खेल उपकरणों की खरीद से, ऐसी अनगिनत परियोजनाओं में से अपनी हिस्सेदारी निकालने के कारण समय-समय पर चर्चा में आए हैं।

राजनीति में नोटों की गड्डियों के प्रति अरुचि जताने वाले लोग बहुत ज्यादा नहीं होंगे। समर आचार्य से पहले भी अनेक राजनेता नोटों की गड्डियों के प्रति प्रेम प्रदर्शित करते पाए गए हैं। सुखराम के घर में तो इतने नोट थे कि उनकी कद्र तक नहीं थी; वे बोरों में भरे पाए गए थे!

जबकि भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण महज एक लाख रुपये लेते हुए इस तरह धर लिए गए कि राजनीतिक निर्वासन में ही चले गए। कुछ राजनेताओं को गड्डियां गिनने का भी शौक है; बताते हैं कि ऐसे अनेक लोगों के घर में नोट गिनने की मशीन है!


हमें तो त्रिपुरा के इस नेता का शुक्रिया अदा करना चाहिए। माकपा का विस्तार हो या न हो, यही क्या कम है कि वह अपनी पुरानी नैतिकतावादी सोच से बाहर निकल रही है!

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed