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बात बिगाड़ने वाले

Mon, 17 Aug 2015 07:59 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Mon, 17 Aug 2015 07:59 PM IST
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who is the Spoiler

भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की प्रस्तावित बातचीत से ऐन पहले जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पड़ोसी मुल्क की ओर से हो रही गोलाबारी भड़काने वाली कार्रवाई के अलावा कुछ और नहीं है। उफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच आतंकवाद के मुद्दे पर बनी सहमति के बाद ही भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके पाकिस्तानी समकक्ष सरताज अजीज के बीच बातचीत की घोषणा की गई थी। इसे दोनों देशों के रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

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मगर इसके बाद से पाकिस्तानी सेना की शह पर न केवल उधमपुर में बीएसएफ की टुकड़ी पर हमला किया गया, बल्कि पंजाब में गुरदासपुर के रास्ते से भी घुसपैठ की कोशिश की गई। भारतीय सुरक्षा बलों के हाथ आया लश्करे तैयबा का आतंकी नवेद पाकिस्तानी सेना और लश्कर सरगना हाफिज मोहम्मद सईद की साठगांठ का ठीक वैसा ही सुबूत है, जैसा मुंबई हमले के दौरान पकड़ा गया कसाब था।
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बीते एक हफ्ते के दौरान जिस तरह से संघर्ष विराम के उल्लंघन के मामले हुए हैं, उससे यह बात और स्पष्ट हो जाती है कि पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान में ऐसे लोग मौजूद हैं, जो भारत से बातचीत को लेकर सहज नहीं हैं। असल में यह वहां की लोकतांत्रिक सरकार और दूसरे अमन पसंद संगठनों को समझने की जरूरत है कि पाकिस्तान का दूरगामी हित भारत से सहज रिश्ता रखने में ही निहित है।
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निस्संदेह भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में काफी पेचीदगियां हैं, जिन्हें दूर करने में वक्त लगेगा, लेकिन यह भी सच है कि पटरी से उतरे रिश्ते बातचीत से ही आगे बढ़ सकते हैं। और फिर ऐसा भी नहीं है कि आतंकवाद से सिर्फ भारत ही पीड़ित है, खुद पाकिस्तान इससे जूझ रहा है, जैसा कि उसके पंजाब प्रांत के गृह मंत्री की आत्मघाती हमले में हुई मौत से पता चलता है।


लेकिन हैरानी की बात यह है कि वह अपने देश के भीतर मौजूद आतंकी केंद्रों की शिनाख्त कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने को तैयार नहीं दिखता। असल में यह पाकिस्तान को तय करना है कि वह बातचीत के इस मौके को किस तरह देखता है।

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