फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   who is following whom

कौन किसके पीछे

Wed, 30 Jul 2014 08:05 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Wed, 30 Jul 2014 08:05 PM IST
विज्ञापन
who is following whom
जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी खुद कह रहे हैं कि उनके घर में जासूसी कराने के उपकरण नहीं पाए गए हैं, तब विपक्ष के हंगामे का बहुत औचित्य नहीं दिखता। संसद में गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बयान को भी कदाचित इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इसके बावजूद एनडीए सरकार इस मुद्दे को जिस तरह खारिज करने की कोशिश कर रही है, वह बहुत आश्वस्त नहीं करता।
विज्ञापन


यह संभव है कि नितिन गडकरी की जासूसी नहीं की गई हो। पर इस मुद्दे पर चर्चा से ही कतराकर सरकार आखिर क्या साबित कर रही है? यह खुलासा किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि भाजपा के सुब्रह्मण्यम स्वामी ने न सिर्फ किया है, बल्कि वह अब भी इस पर मजबूती से टिके हुए हैं। इसके बावजूद भाजपा इस मुद्दे पर कुछ बोलने से कन्नी काट रही है। इस प्रसंग ने दरअसल भारतीय राजनीति के उस विद्रूप को ही फिर बेनकाब किया है कि सत्ता में आने और विपक्ष में होने पर तर्क और नैतिकता की कसौटी किस तरह बदल जाती है।
विज्ञापन


यूपीए सरकार में वित्त और रक्षा मंत्रालय की जासूसी करने के आरोप जब सामने आए थे, तब विपक्षी पार्टी के तौर पर भाजपा ने संसद में सरकार को ठीक उसी तरह घेरने की कोशिश की थी, जैसी अब कांग्रेस कर रही है। और बचाव में जो तर्क तब मनमोहन सिंह सरकार ने दिए थे, वही अब नरेंद्र मोदी की सरकार दे रही है। पर आरोप और बचाव की इस पूरी राजनीति में बड़ा मुद्दा अनुत्तरित है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कांग्रेस का कहना है कि मंत्रियों पर नजर रखने के लिए गुजरात में जो तरीका इस्तेमाल किया जाता है, यह उसी का केंद्र में विस्तार है। जबकि सुब्रह्मण्यम स्वामी इस कथित जासूसी के पीछे पिछली यूपीए सरकार का हाथ बता रहे हैं। यूपीए सरकार के समय ही अमेरिका द्वारा भारत की जासूसी करवाने का मामला सामने आया था और तब भाजपा ने इस पर कड़ा रुख अपनाया था।


ऐसे में, जासूसी से जुड़े कांग्रेस के ताजा आरोप पर भाजपा को तो संसद में मुखर होना चाहिए था। इसके बजाय एनडीए सरकार की चुप्पी से यह संदेह गाढ़ा ही होता है कि वह इस मामले पर गंभीरता जताकर अमेरिका से अपना रिश्ता खराब करने का जोखिम नहीं उठाना चाहती। तब तो और नहीं, जब अमेरिकी विदेश मंत्री भारत आए हैं और हमारे प्रधानमंत्री की बहुप्रतीक्षित वाशिंगटन यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच गर्मजोशी भरे रिश्ते की शुरुआत हो चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed